कतर में 21 नवंबर से 18 दिसंबर तक दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल टूर्नामेंट वर्ल्ड कप का आयोजन होना है। इसके लिए एडिडास कंपनी ने नई गेंद का अनावरण कर दिया है। एडिडास ने गेंद का नाम 'अल रिहला' रखा है।
कतर में 21 नवंबर से 18 दिसंबर तक दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल टूर्नामेंट वर्ल्ड कप का आयोजन होना है। इसके लिए एडिडास कंपनी ने नई गेंद का अनावरण कर दिया है। एडिडास ने गेंद का नाम 'अल रिहला' रखा है। अरबी भाषा के इस शब्द का अर्थ है यात्रा या सफर होता है। 1930 से हो रहे वर्ल्ड कप में अब तक 21 गेंदों का इस्तेमाल हो चुका है। एडिडास 1970 वर्ल्ड कप से गेंद बना रही है। यह उसकी 14वीं गेंद है।
आइए अब तक इस्तेमाल हुए गेंद के बारे में जानते हैं:
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वर्ल्ड कप बॉल
- फोटो : सोशल मीडिया
1930 (टिएंटो/टी-मॉडल): उरुग्वे ने टूर्नामेंट की मेजबानी की थी। तब टी-मॉडल गेंद का इस्तेमाल हुआ था। फाइनल में अर्जेंटीना की टीम इस गेंद से सहमत नहीं थी। इस पर फीफा ने पहले हाफ में अर्जेंटीना द्वारा लाए गए टिएंटो बॉल और दूसरे हाफ में उरुग्वे के टी-मॉडल गेंद का इस्तेमाल किया गया था। उरुग्वे की गेंद ज्यादा भारी थी। गेंद में 13 पैनल थे। एक जगह सिलाई का इस्तेमाल किया गया था।
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1934 (फेडरेल 102): इटली की मेजबानी में फेडरेल 102 बॉल से मैचों का आयोजन कराया गया था। यह 1930 वर्ल्ड कप में इस्तेमाल हुए गेंद की तरह ही था।
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वर्ल्ड कप बॉल
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1938 (एलेन): फ्रांस की मेजबानी में एलेन गेंद से मैच हुए थे। इस बार सिलाई वाले जगह पर तीन पैनल थे। अन्य स्थानों पर दो पैनलों का ही इस्तेमाल किया गया था।
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1950 (सुपर डुपलो): ब्राजील ने पहली बार वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। इस पर सुपर डुपलो गेंद से मैच हुए थे। पहली बार ऐसी गेंद का इस्तेमाल किया गया जिसमें हवा न आ सकती थी और न ही जा सकती थी। जितनी हवा गेंद में थी उतनी बरकरार रहती थी।
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1954 (स्विस डब्ल्यूसी बॉल): स्विट्जरलैंड में आयोजित वर्ल्ड कप में पहली बार 18 पैनल वाले गेंद से मैच आयोजित हुए। फीफा ने आधिकारिक तौर पर गेंद के आकार, वजन और व्यास का निर्धारण किया था।
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1958 (टॉप स्टार): इस गेंद का चयन फीफा ने 100 से ज्यादा उम्मीदवारों का टेस्ट लेकर किया था। वर्ल्ड कप का आयोजन स्वीडन में हुआ था।
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1962 (क्रैक): चिली में आयोजित वर्ल्ड कप में क्रैक गेंद का इस्तेमाल हुआ था। इसमें अष्टकोणीय पैनल थे। इस गेंद से पूरे वर्ल्ड कप मे मैच नहीं खेले गए थे।
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1966 (चैलेंज): इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। इस बार गेंद का नाम चैलेंज रखा गया। वह नारंगी रंग का था।
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1970 (टेलस्टर): मैक्सिको में वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ था। पहली बार एडिडास ने गेंद को बनाया। उस समय से यही कंपनी गेंद बना रही है। पहली बार गेंद में 32 पैनल थे। सफेद और काले रंग के इस्तेमाल से इस गेंद को टीवी पर देखने में आसानी होती थी।
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1974 (टेलस्टर डूरलास्ट): वेस्ट जर्मनी ने इस बार वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। पहली बार गेंद को वाटरप्रूफ बनाया गया था।
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1978 (टैंगो): अर्जेंटीना में वर्ल्ड कप आयोजित हुआ था। इस बार टैंगो का गेंद का इस्तेमाल हुआ था। इस गेंद से ओलंपिक और यूरोपियन चैंपियनशिप के मैच हुए थे।
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1982 (टैंगो एस्पाना): स्पेन ने वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। इस टूर्नामेंट में आखिरी बार लेदर गेंद का इस्तेमाल हुआ था।
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1986 (एजटेका): मैक्सिको को फिर से वर्ल्ड कप की मेजबानी मिली थी। एडिडास ने गेंद का नाम इस बार एजटेका रखा था। पहली बार पूरी तरह सिंथेटिक से बने गेंद का इस्तेमाल हुआ था।
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1990 (ट्रेवेस्को): इटली की मेजबानी में पॉलीयूरेथेन के इस्तेमाल से बने गेंद से मैच हुए थे। यह वजन में पहले से हल्का था।
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1994 (क्वेस्ट्रा): अमेरिका को पहली बार वर्ल्ड कप की मेजबानी मिली थी। इस बार गेंद का नाम क्वेस्ट्रा रखा गया था। पॉलिस्ट्रीन के इस्तेमाल के कारण गेंद पहले से तेज गति से भागती थी।
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1998 (ट्राइकलर): फ्रांस की मेजबानी में इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ था। सफेद और काले रंग की गेंद की जगह फ्रांस के झंडे से प्रेरित तीन रंगों की गेंद का इस्तेमाल हुआ था।
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2002 (फेवरनोवा): कोरिया और जापान की मेजबानी में इस बार वर्ल्ड कप के मैच हुए थे। त्रिकोणीय डिजाइन के कारण फेवरनोवा को आधुनिक वर्ल्ड कप का सबसे बेहतर गेंद बताया गया।
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2006 (टिमजेस्ट): जर्मनी में वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ था। इस बार गेंद का नाम टिमजेस्ट रखा गया था। यह पहला 14 पैनल वाला गेंद था।
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2010 (जाबुलानी): पहली बार दक्षिण अफ्रीका में फुटबॉल वर्ल्ड कप आयोजित किए गए थे। पहली बार आठ पैनल का इस्तेमाल गेंद में हुआ था। गति और हवा में असमान स्विंग के कारण यह वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे विवादित गेंद साबित हुआ।
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2014 (ब्राजूका): ब्राजील में आयोजित वर्ल्ड कप का नाम ब्राजूका रखा गया था। पहली बार फैंस ने वर्ल्ड कप गेंद का नाम चुना था। इस बार सबसे कम छह पैनल का इस्तेमाल किया गया था।
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2018 (टेलस्टर 18): रूस में वर्ल्ड कप का आयोजन पहली बार हुआ था। पिछली बार की तरह इसमें भी छह पैनल थे।
2022 (अल-रिहला): इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन पहली बार कतर में होगा। अल-रिहला का मतलब 'एक यात्रा' है। कंपनी के मुताबिक, इस बार की गेंद में तेजी और सटीकता है और यह अभी तक के इतिहास में हवा में सबसे तेजी से भागने वाली गेंद है।