किसी भी खेल में हार-जीत सिर्फ नतीजा रह जाती है। मगर खेल को खेल की भावना से खेलना ही उसे खेल और खिलाड़ी को बड़ा बनाता है। यही बात प्रधानमंत्री मोदी ने रियो जाने से पहले भारतीय खिलाड़ियों से कही थी।
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हारकर भी सिंधू के एक कदम ने जीत लिया विरोधियों की भी दिल
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पीवी सिंधू
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इसी का उदाहरण भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने भी दिया। सिंधू भले ही मैच हार गई हों, मगर उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया।
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सिंधू ने कोर्ट में तो कमाल किया ही, मगर मैच के बाद जो सिंधू ने किया, उसे देखकर खेल भावना की अलग ही मिसाल मिली। सिंधू ने मैच खत्म होने के बाद अपनी विरोधी खिलाड़ी मरीन कैरोलीना को गले लगाया।
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जवाब में कैरोलीना ने भी सिंधू को गले लगाया। खेल में एक की जीत और दूसरे की हार निश्चित है, मगर इस दृश्य से एक बात साफ हो गई कि खेल भावना हार-जीत से बड़ी है।
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अमूमन खिलाड़ी मैच के बाद हाथ मिलाते हैं, मगर इस मैच के बाद दोनो ही खिलाड़ी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और इमोशनल हो गया।
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पीवी सिंधू ने रियो ओलंपिक का बैडमिंटन फाइनल मैच स्पेन की मारीन कैरोलीन से गंवा दिया। हालांकि वर्ल्ड नबंर वन को सिंधू ने कड़ी टक्कर दी।
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सिंधू ने पहला सेट 21-19 से जीता। दूसरे सेट में सिंधू 12-21 से हार गई और तीसरे सेट का नतीजा 15-21 से सिंधू के खिलाफ गया।
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सिंधू भारत के लिए रजत पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं। सिंधू भारत की तरफ से किसी भी स्पर्धा के ओलंपिक फाइनल में भी पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं।
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सिंधू ने इस मैच में कैरोलीना को कड़ी टक्कर दी, मगर पहला सेट हारने के बाद कैरोलीना ने जोरदार वापसी की। सिंधू ने मैच बचाने की भरपूर कोशिश की।
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सिंधू भारत की सबसे कम उम्र की पदक विजेता बन गई हैं। वर्ल्ड नंबर 10 सिंधू फिलहाल 21 साल की हैं। सिंधू ओलंपिक पदक जीतने वाली 5वीं भारतीय महिला खिलाडी हैं।
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सिंधू के माता पिता वॉलीबॉल खिलाडी हैं। सिंधू ने विश्व विख्यात दिग्गज खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद के साथ जमकर ट्रेनिंग की। उनका मेडल उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है।