फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीखें सफल होने के 5 सूत्र

Thu, 28 Feb 2019 11:55 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
krishna - फोटो : krishna
गीता में जीवन के सार का वर्णन बहुत ही विस्तार से किया है। गीता को भगवान श्रीकृष्ण का ही एक स्वरूप माना गया है। गीता में मनुष्य के जीवन को सफल बनाने के लिए की सूत्रों का वर्णन किया गया है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी तमाम बातों का अध्ययन करके सीखा जा सकता है। आइए जानते हैं भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी कुछ अहम बातें...
विज्ञापन

2 of 6
krishna - फोटो : krishna
पहला मंत्र-शान्त स्वभाव रखकर काम करना
वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण बचपन में बहुत नटखट स्वभाव के थे। विपरीत परिस्थितियां आने पर उनका स्वभाव हमेशा शान्त रहता था। कृष्ण जी भगवान विष्णु के अवतार थे और वे यह बात जानते भी थे कि कंस मामा उन्हें बार-बार मारना चाहते थे, फिर भी वे शांत रहते थे और समय आने पर कंस के हर प्रहार का मुंह तोड़ दिया। इससे सीख मिलती है कि कठिन समय में भी अपने शान्त स्वभाव का त्याग नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन

3 of 6
krishna - फोटो : krishna
दूसरा मंत्र-साधारण जीवन जीना 
भगवान श्रीकृष्ण हमेशा साधारण जीवन जीने में विश्वास करते थे। गोकुल के राजघराने में परविश होने के बावजूद वह अन्य सामान्य बालको के साथ रहते, खेलते और घूमते रहते थे। उन्हें कभी भी अपने राजघराने का घमंड नहीं था। 

4 of 6
krishna - फोटो : krishna
तीसरा मंत्र- कभी हार न मानना
कभी भी उनका मन बुरा समय आने पर घबराता नहीं था। वह विपरीत परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करते थे। उनका मनाना था बुरे समय में विवेक पूर्वक काम करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कभी भी हार न मनाने का संदेश दिया था। अंत का प्रयास करते रहना चाहिए, भले ही परिणाम हमारे पक्ष में क्यों न हो।
विज्ञापन

5 of 6
krishna - फोटो : krishna
चौथा मंत्र-दोस्ती निभाना 
कृष्ण और सुदामा की दोस्ती को कौन नहीं जानता? यह दोस्ती महज दोनों के प्रेम के कारण नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति आदर के कारण भी प्रसिद्ध है। किंतु आज के जमाने में दोस्ती के असली मायने कोई नहीं जानता। श्रीकृष्ण ने हमेशा अपने मित्र सुदामा और अर्जुन का साथ दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
पांचवा मंत्र-माता-पिता का हमेशा आदर करना
श्रीकृष्ण को जन्म देवकी ने दिया था लेकिन उनका पालन-पोषण यशोदा और राजा नंद ने गोकुल में किया। यह जानते हुए कि उनके अपने माता-पिता उनसे दूर हैं। श्रीकृष्ण ने उन्हें दिल से प्रेम किया। उनका आदर और सम्मान करने में कोई कसर ना छोड़ी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें