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Chanakya Niti: अपने शत्रुओं को परास्त करने के लिए गांठ बांध लें आचार्य चाणक्य की ये बातें

Sun, 27 Mar 2022 11:17 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
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आचार्य चाणक्य के अनुसार सफलता पाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शत्रुओं का होना आम बात है। - फोटो : अमर उजाला
Chanakya Niti: चाणक्य नीति मूल रूप से संस्कृत में लिखी गई है, बाद में इसका अंग्रेजी और कई अन्य भाषाओं में अनुवाद किया गया और हिंदी में भी। आधुनिक दुनिया में भी, लाखों लोग प्रतिदिन कौटिल्य नीति को अपनी भाषा में पढ़ते हैं और उससे प्रेरित होकर, कई राजनेता,  व्यापारी अभी भी चाणक्य उद्धरण को आधुनिक जीवन में उपयोगी पाते हैं।आचार्य चाणक्य का ज्ञान राजनीति, व्यापार और धन के बारे में ज्ञान इतना सटीक है कि यह आज के युग में भी उपयोगी है। आचार्य चाणक्य का यह ज्ञान नीतिशास्त्र के रूप में जाना जाता है। चाणक्य नीति आपको अपने जीवन में कुछ भी हासिल करने में मदद करती है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस क्षेत्र में हैं।  यदि आप चाणक्य नीति को पूरी तरह से पढ़ते हैं और उसका अनुसरण करते हैं, तो कोई भी आपको सफल होने से रोक नहीं सकता आप कभी भी किसी के धोखे का शिकार नहीं होंगे और जीवन में हमेशा सफलता पाएंगे। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों सबके लिए कोई न कोई सीख दी है। आचार्य चाणक्य के अनुसार सफलता पाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शत्रुओं का होना आम बात है। ये लोग आपकी सफलता में बाधा डालने का काम करते हैं। लेकिन जो व्यक्ति साहसी और अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर और अडिग है, वह अपने शत्रुओं को अपने पर हावी नहीं होने देता। आइए जानते हैं कि अपने शत्रुओं को परास्त करने के लिए आचार्य चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र में क्या उपाय बताए हैं। 
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शत्रु को कभी भी खुद से कमजोर नहीं समझना चाहिए। - फोटो : istock
शत्रु को कभी अपने से कम न समझें 
आचार्य चाणक्य के अनुसार शत्रु को कभी भी खुद से कमजोर नहीं समझना चाहिए। यदि आपने अपने शत्रु को अपने से कम समझ है इसका अर्थ है कि आपके अंदर अहंकार ने जन्म ले लिया है और जब व्यक्ति के मन में अहंकार आ जाता है तो इसका लाभ शत्रु को मिलता है और आपको इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। 
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आचार्य चाणक्य के अनुसार दुश्मन की हर चाल आपको मालूम होनी चाहिए। - फोटो : istock
शत्रु के चाल-चलन पर नजर रखें 
आचार्य चाणक्य के अनुसार शत्रु क्या कर रहा है और क्या नहीं इस पर नजर रखनी बेहद आवश्यक है। आचार्य चाणक्य के अनुसार शत्रु के चाल- चलन को कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। दुश्मन की हर चाल आपको मालूम होनी चाहिए। यदि आपके पास आपके दुश्मन की पूरी जानकारी है तभी आप उसे चार कदम आगे की सोच सकते हैं और उसे परास्त करने की सफल योजना बना सकते हैं।

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आचार्य चाणक्य के अनुसार आपका शत्रु कितने पानी में है इसका आकलन करना भी बेहद आवश्यक है। - फोटो : istock
शत्रु की शक्ति को भी समझें 
आचार्य चाणक्य के अनुसार आपका शत्रु कितने पानी में है इसका आकलन करना भी बेहद आवश्यक है। आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि आपका शत्रु ताकतवर हैं तो आपको सही समय का इंतजार करना चाहिए। और इसी बीच अपनी शक्तियों को बढ़ाने का काम करना चाहिए। यदि आप ऐसा करेंगे तो आप शत्रु की प्रकृति को समझेंगे और समय आने पर आप के जीतने के आसार बढ़ जाएंगे। 
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अपने अंदर कभी भी अहंकार की भावना न आने दें।   - फोटो : istock
अहम में न फंसे 
मनुष्य के अंदर यदि अहम की भावना आ जाती है तो इसका अर्थ है कि वह व्यक्ति अपने से ऊपर किसी को नहीं समझता। इसको लेकर आचार्य चाणक्य का मानना है कि अहम या अहंकार शत्रुओं की संख्या में इजाफा ही करता है इसलिए जितना हो सके अपने अंदर कभी भी अहंकार की भावना न आने दें।  
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जो व्यक्ति मौन रहकर रणनीति बनाता है, उसके बारे में जान पाना किसी के लिए भी असंभव होता है। - फोटो : istock
गुस्सा जाहिर न करें 
आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि कोई आपका अपमान करे तो अपना गुस्सा जाहिर न होने दें, बल्कि मौन धारण कर लें। जो व्यक्ति मौन रहकर रणनीति बनाता है, उसके बारे में जान पाना किसी के लिए भी असंभव होता है। आचार्य चाणक्य ने इसी नीति को अपनाया था। वह नंद महाराज द्वारा अपमानित होने पर मौन ही रहे थे और उन्होंने नंद को बेदखल करने के लिए गुपचुप तरीके से रणनीति तैयार की और आखिरकार साधारण से बालक चंद्रगुप्त को सम्राट बना दिया। 
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शत्रु को अपनी नीति के जाल में इस तरह फंसाइए कि उसका निकलना नामुमकिन हो जाए।  - फोटो : istock
शत्रु के स्वभाव के अनुसार रणनीति बनाएं 
आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि अपने शत्रु को परास्त करना है तो उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल करना जरूरी है कि आपका शत्रु कितना बलवान या कमजोर है। यदि आपका शत्रु ज्यादा शक्तिशाली है तो आपको उसे हराने के लिए उसके अनुकूल आचरण करना चाहिए। वहीं अगर दुश्मन कमजोर है और छल करने वाला है तो उसके विपरीत आचरण करना चाहिए। अगर दुश्मन भी आप ही के समान बलशाली है तो उसे पहले अपनी नीति के जाल में इस तरह फंसाइए कि उसका निकलना नामुमकिन हो जाए। 
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