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Chanakya Niti: जानिए किन परिस्थितियों में पत्नी समेत भाई-बहन का कर देना चाहिए त्याग?

Thu, 08 Jul 2021 06:24 PM IST
संकल्प सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य के अनमोल विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने तब थे। उनके द्वारा सुझाए गए रास्ते पर अगर चला जाए, तो व्यक्ति सदा कामयाबी पाता है। आपको बता दें कि आचार्य चाणक्य कुशाग्र बुद्धि के धनी थे। उन्होंने एक साधारण से दिखने वाले बालक को शिक्षा देकर भारत का महान शासक बना दिया था। चाणक्य ने राजनीति से लेकर जीवन के गूढ़तम मूल्यों पर अपनी शिक्षा दी। चाणक्य नीति में उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं का पूरा ब्यौरा हमें मिलता है। मनुष्य को कैसा जीवन जीना चाहिए? उसका समाज और अपने परिवार के प्रति क्या कर्तव्य है? उसका आचरण कैसा होना चाहिए? उसे किन-किन बातों का ध्यान देना चाहिए? इसका पूरा उल्लेख हमें चाणक्य नीति में देखने को मिलता है। उनके द्वारा बताए मार्गों पर अगर कोई इंसान चले तो बड़ी से बड़ी कठनाइयों को आराम से पार कर सकता है। उन्होंने पत्नी, भाई-बहन, गुरु और धर्म को व्यक्ति के जीवन में काफी महत्वपूर्ण बताया था। ऐसे मे आचार्य चाणक्य ने किन-किन परिस्थितियों में इनके त्याग करने की बात कही है। आइए जानते हैं - 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
पति-पत्नी का रिश्ता जीवन में काफी अहम होता है। जीवन में आने वाली गंभीर से गंभीर चुनौतियों को दोनों एक दूसरे के सहयोग से पार करते हैं। वहीं अगर कोई ऐसी पत्नी है, जो हमेशा क्रोध में रहती है और अपने पति के हर कार्य में अड़चन खड़ी करती है। आचार्य चाणाक्य के मुताबिक ऐसी पत्नी का ठीक समय पर त्याग कर देना चाहिए वरना जीवन नरक हो जाता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य के अनुसार जो धर्म हिंसा की बात करता है और उसमें दया की कोई जगह नहीं होती। उस धर्म का त्याग कर देना उचित होता है। ऐसा धर्म इंसान के भीतर से मानवता को खत्म कर देता है। बिना दया और अहिंसा के जीवन में कोई मूल्य नहीं बचता।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
हमारे समाज में गुरु का एक विशेष स्थान होता है। माता-पिता और गुरु से ज्यादा मूल्यवान जीवन में कुछ भी नहीं है। ऐसे में गुरु के संदर्भ में चाणक्य कहते हैं कि जो गुरु अपने शिष्य को ठीक शिक्षा नहीं देता। ऐसे गुरुओं का त्याग कर देना चाहिए।  
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आचार्य चाणक्य - फोटो : social media
जीवन में भाई-बहन का काफी अनमोल रिश्ता होता है। सुख-दुख में यही लोग एक दूसरे का सहारा बनते हैं। ऐसे में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर आपका भाई बहन आपसे किसी भी प्रकार का स्नेह या प्रेम भाव नहीं रखता और विपरीत परिस्थितियों में साथ खड़ा नहीं होता। इस तरह के भाई बहन का समय रहते त्याग कर देना उचित होता है। 
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