Chanakya Niti for Success
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प्दुष्टाभार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः ।
ससर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव नः संशयः ।।
इस चाणक्य नीति श्लोक का अर्थ है कि व्यक्ति को बुरे जीवनसाथी, झूठे दोस्तों, आलसी नौकरों और दुश्मनों से हमेशा बचना चाहिए। यह बिल्कुल मृत्यु को स्वीकृति देने जैसा है। यानी ऐसे लोग अपने फायदे के लिए एक साथ होते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पए आपको छोड़ कर जा सकते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।