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भगवान शिव के इस अवतार से नहीं बच पाए थे शनिदेव, हो गए थे लंगड़े

Sun, 14 Jan 2018 09:07 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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धर्म ग्रन्थों में भगवान शिव के अनेक अवतारों के बारे में बताया गया है, लेकिन बहुत कम लोग शिव के इन अवतारों के बारे में जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग भगवान शिव के इस अवतार के बारे में जानते हैं। इन्हीं अवतार में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने शनिदेव पर भी प्रहार किया था जिसके कारण शनिदेव की गति मंद हो गई।
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shani dev
पुराणों के अनुसार भगवान शंकर ने अपने परम भक्त दधीचि मुनि के यहां पुत्र रूप में जन्म लिया। भगवान ब्रह्रा ने इनका नाम पिप्पलाद रखा। जन्म लेने के बाद ही इनके पिता की मृत्यु हो गई। बड़े होने पर पिप्पलाद को अपने पिता की मृत्यु का कारण शनिदेव की कुदृष्टि के बारे में पता चला।
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तब उन्होंने क्रोधित होकर शनिदेव के ऊपर ब्रह्रादंड का प्रहार किया। शनि देव ब्रह्रा दंड का प्रहार नहीं सह सकते थे इसलिए वे उससे डर कर भागने लगे। तीनों लोको की परिक्रमा करने के बाद भी ब्रह्रा दंड ने शनिदेव का पीछा नहीं छोड़ा और उनके पैर पर आकर लग गया। 

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इससे शनि के दोनों पैर टूट गये। शनि देव दुखी होकर भगवान शिव को पुकारने लगे। भगवान शिव ने आकर पिप्पलाद का क्रोध शांत किया और शनि की रक्षा की। इस दिन से ही शनि पिप्पलाद से भय खाने लगे। पिप्लाद का जन्म पीपल के वृक्ष के नीचे हुआ था और पीपल के पत्तों को खाकर इन्होंने तप किया था इसलिए ही पीपल की पूजा करने से शनि का अशुभ प्रभाव दूर होता है।
 
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भगवान शिव की प्रार्थना पर पिप्पलाद ने शनि को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक के शिवभक्तों को कष्ट नहीं देंगे अगर ऐसा हुआ तो शनि देव भस्म हो जाएंगे। 
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