फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sawan 2020: यकीन मानिए शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप

Thu, 09 Jul 2020 05:59 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

सावन चल रहा है तो भक्त अपने भगवान से जुड़ी हर बात को जानना चाहता है। इसलिए सावन में हम आज आपको शिव जी के बारे में ऐसी कुछ बातें बताएंगे। जिनके बारे में शायद आप न जानते हो। आइए जानते हैं शिव से जुड़े रहस्य...

विज्ञापन

2 of 7
शिव पार्वती (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

भगवान भोलेनाथ का विवाह राजा दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। परंतु उनके पिता के द्वारा भगवान शिव का अपमान करने पर उन्होंने यज्ञकुंड में अपनी आहुति दे दी थी। उसके बाद उन्होंने पार्वती जी के रुप में राजा हिमालय के यहां जन्म लिया और माता पार्वती के साथ शिव जी का विवाह हुआ। कहा जाता है कि गंगा, काली और उमा भी भगवान शिव की ही पत्नियां थी।

 

विज्ञापन

3 of 7
भगवान शिव के पुत्र(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social media

भगवान शिव से विवाह के बाद दोनों की शक्ति से कार्तिकेय का जन्म हुआ था। गणेश जी माता पार्वती के पुत्र थे। वे माता के उबटन से जन्में थे। भगवान शिव के तेज से जलंधर उत्पत्ति हुई थी। तो वहीं भूमा ने शिव जी के ललाट की पसीने की बूंद से जन्म लिया था। भगवान भोलेनाथ और मोहिनी के संयोग अय्यप्पा का जन्म हुआ था। भगवान भोलेनाथ के दो और पुत्र थे जिनका नाम अंधक और खुजा था। इन दोनों के बारे में कहीं पर ज्यादा उल्लेख नहीं किया गया है।

 

4 of 7
भगवान शिव - फोटो : Social Media

सप्तऋषियों को शिव का प्रारंभिक शिष्य कहा गया है। इन ऋषियों के द्वारा ही शिव के ज्ञान का प्रचार पूरे पृथ्वी लोक पर हुआ। कहा जाता है सर्वप्रथम शिव जी से ही गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्तें की शुरुआत हुई थी। वशिष्ठ और अगस्त्य मुनि का नाम भी शिव के शिष्यों में लिया जाता है। सप्तऋषियों के अलावा गौरशिरस मुनि भी शिव के शिष्य थे।

 

विज्ञापन

5 of 7
हर काल में शिव दर्शन देते हैं (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : File Photo

भगवान शिव ने हर युग में भक्तों के दर्शन दिए हैं। सतयुग में समुद्र मंथन के समय भी शिव थे और उन्होंने समस्त सृष्टी के कल्याण के लिए विषपान किया था। त्रेता युग में भी राम के समय शिव थे। भगवान शिव द्वापर युग में महाभारत काल में भी थे। भविष्य पुराण में कहा गया है कि मरुभूमि पर राजा हर्षवर्धन को भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। कलिकाल में विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का जिक्र मिलता है।

विज्ञापन

6 of 7
शिव जी को पशुपतिनाथ भी कहते हैं (सांकेतिक तस्वीर)

भगवान शिव असुर, दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, आदिवासी और सभी वनवासियों के आराध्य देव हैं। इसलिए शिव को पशुपति नाथ भी कहा जाता है। चंद्रवंश शुरुआत भगवान शिव को कारण ही हुई थी तो वहीं सूर्यवंशी, खुद मनु थे। इसलिए चंद्रवंशी, सूर्यवंशी अग्निवंशी और नागवंशी आदि सभी को भी शिव की ही परंपरा का ही माना जाता है।

शैव धर्म शिव से संबंधित भारत के आदिवासियों का धर्म है। सभी दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव धर्म के ही संप्रदाय हैं इसलिए इन सभी के देवता भगवान शिव हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
शिव जी

ऐसा माना जाता है कि भगवान बुद्ध शिव जी ही का अवतार थे। पालि ग्रंथों में 27 बुद्धों का उल्लेख किया गया है। जिसमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन नाम बताए गए हैं- बुद्ध के तीन नाम तणंकर, शणंकर और मेघंकर भी थे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें