फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pitru Paksha 2020: जानिए कहां-कहां पितरों को तर्पण करने से मिलता है विशेष पुण्य

Wed, 02 Sep 2020 06:27 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
Pitru Paksha 2020: हमारे पूर्वज पूर्णिमा के दिन चले गए हैं उनके पूर्णिमा श्राद्ध ऋषियों को समर्पित होता है।
मृत्यु को प्राप्त कर चुकी जीव आत्माओं के लिए पितृपक्ष काफी महत्वपूर्ण समय होता है। पितरों के प्रति श्रद्धा दिखाने का पक्ष श्राद्धपक्ष कहलाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष के भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन माह की सर्वपितृ अमावस्या तक का समय पितरों का होता है। मान्यता है पितृपक्ष के दौरान पितरलोक से हमारे पूर्वज अपने-अपने परिजनों से मिलने और उनको आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। पितृपक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए उन्हें तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान दिया जाता है। पितृपक्ष में ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। देश में कुछ ऐसे स्थान है जहां पर पितरों को तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व और पौराणिक इतिहास है। 
विज्ञापन

2 of 7
Pitru Paksha
गया 
गया में पितरों का पिंडदान करने का विशेष महत्व है। बिहार की राजधानी पटना से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर फल्गु नदी के तट पर गया बसा हुआ है। पितृ पक्ष के दौरान यहां हजारों की संख्या में लोग अपने पितरों का पिण्डदान करते है। ऐसी मान्यता है कि यदि इस स्थान पर पिण्डदान किया जाय तो स्वर्ग मिलता है। भगवान राम ने भी अपने पिता का पिंडदान गया में ही किया था। पितृपक्ष में गया तीर्थ में जाकर हम पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके पितृऋण से मुक्ति पा सकते हैं क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु पितृ देवता के रूप में गयातीर्थ में निवास करते हैं।
विज्ञापन

3 of 7
pitra paksha 2020
प्रयागराज
प्रयाग को सभी तीर्थों में प्रमुख स्थान माना जाता है यहां पर तीन नदिया गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। पितृपक्ष में प्रयाग का विशेष स्थान है माना जाता है  पितृपक्ष में बड़ी संख्या में लोग यहां पर अपने पूर्वजो को श्राद्ध देने आते हैं।

4 of 7
shradh
बद्रीनाथ
बद्रीनाथ भारत के चार प्रमुख धामों में एक है। यह स्थान भगवान विष्णु का है जहां पर विराजते है। बद्रीनाथ के ब्रहमाकपाल क्षेत्र में तीर्थयात्री अपने पितरों का आत्मा का शांति के लिए पिंडदान करते हैं। ऐसी मान्यता है यही पर पाण्डवों ने भी अपने पितरों का पिंडदान किया था।
विज्ञापन

5 of 7
shradh
सिद्धनाथ मध्य प्रदेश
यह स्थान उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे है यहां पर भी पितरों को श्राद्ध अर्पित करते है। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर एक वटवृक्ष है जिसे माता पार्वती ने अपने हाथो से स्वयं लगाया था। पितर पक्ष में बड़ी संख्या में लोग इस स्थान पर अपने पितरों को श्राद्ध देते हैं।
विज्ञापन

6 of 7
shradh
काशी 
ऐसी मान्यता है कि काशी में मरने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। काशी पूरे संसार में धर्म और आध्यात्म के लिए जाना जाता है। यह नगर भगवान शिव का माना जाता है। काशी में पिशाचमोचन कुंड पर श्राद्ध का विशेष महत्व होता है । यह स्थान पर पितरों के अकाल मृत्यु होने पर पिंडदान करने पर मोक्ष प्राप्त होता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
आरंभ हुए पितृ पक्ष - फोटो : अमर उजाला
पिण्डारक गुजरात
गुजरात के द्वारिका से 30 किलोमीटर का दूरी पर पिण्डारक स्थान है यहां पर एक नदी है जहां पर श्राद्ध कर्म करने के बाद नदी मे पिण्ड डालते है और अपने पितरों की आत्मा की शान्ति के लिए श्राद्ध आदि कर्म करते हैं
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें