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Paush Amavasya 2024: आज पौष माह की अमावस्या, जानें तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

Mon, 30 Dec 2024 07:36 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Paush Amavasya 2024 Niyam: सनातन धर्म में अमावस्या को बहुत महत्व दिया गया है। कहा जाता है कि श्राद्ध करने से पितर बहुत प्रसन्न होते हैं। अमावस्या पर स्नान और दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।
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paush amavasya 2024 - फोटो : amar ujala
Paush Amavasya 2024 Puja Vidhi: आज पौष माह की अमावस्या है। सनातन धर्म में अमावस्या को बहुत महत्व दिया गया है। कहा जाता है कि श्राद्ध करने से पितर बहुत प्रसन्न होते हैं। अमावस्या पर स्नान और दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी। साथ ही आपको जीवन की समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार अब पौष माह शुरू हो चुका है। आइए जानते हैं पौष माह की सोमवती अमावस्या कब है और इस दिन क्या विशेष उपाय करने चाहिए ताकि भगवान की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहे।

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पौष अमावस्या 2024 कब है
पौष अमावस्या की तिथि
पौष अमावस्या तिथि आरंभ: 30 दिसंबर, सोमवार, प्रातः 04:01 से 
पौष अमावस्या तिथि समाप्त: 31 दिसंबर, मंगलवार, प्रातः 03, 56 से 
उदयातिथि के आधार पर पौष अमावस्या सोमवार को होगी और इसीलिए यह अमावस्या  सोमवती अमावस्या कहलाएगी। 
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पौष अमावस्या 2024 कब है
पूजा और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
सोमवती अमावस्या का ब्रह्म मुहूर्त 30 दिसंबर को प्रातः 5:24 बजे से प्रातः  6:19 बजे तक रहेगा। 
पूजा स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: वृद्धि योग में सुबह से लेकर रात्रि 8: 32 मिनट मुहूर्त रहने वाला है। 
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सोमवती अमावस्या 2024 - फोटो : अमर उजाला
सोमवती अमावस्या पर क्या करें?
  • सोमवती अमावस्या वाले दिन  ब्रह्म मुहूर्त में उठें और नित्य क्रिया के पश्चात स्नान करें।  
  • फिर श्वेत वस्त्र धारण कर अपने पितरों का स्मरण कर उनके लिए तर्पण करें। 
  • आप काले तिल, सफेद फूल और कुश से पितरों को पानी दें। 
  • पितरों का आशीर्वाद लेने के लिए उस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीया जरूर जलाना चाहिए। 
  • मान्यता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को पितृदोष से मुक्ति मिलती है। 
  • सोमवती अमावस्या वाले दिन आप पीपल के पेड़ की पूजा करें और उसकी 7 बार परिक्रमा कर जल अर्पित करें। 
  • इसके बाद सरसो के तेल में काले तिल डालकर दीया जलाएं। 
  • अगर आपके पितर रुठे हुए हैं तो उन्हें मनाने के लिए पितृ चालीसा का पाठ कर प्रसन्न करें। 
  • इस दिन गरीब ब्राह्मणों को भोजन और जरूरतमंदों को दही-दूध, फल, वस्त्र, अन्न और काले तिल दान करने का बहुत महत्व होता है। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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