ज्योतिष के अनुसार सूर्य ही एक ऐसा ग्रह है जो कभी वक्री नहीं होता है। ये सदैव मार्गी रहता है। सूर्य प्रत्येक माह एक राशि से दूसरी राशि में प्रेवश करता है। सूर्य के राशि परिवर्तन की तिथि के संक्रांति कहा जाता है। इस तरह से एक वर्ष में 12 संक्रांति तिथियां आती हैं। सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है, उसी के अनुसार संक्रांति तिथि का नाम होता है। जिस तरह से सूर्य के मकर में प्रवेश करने की तिथि के मकर संक्रांति मनाई जाती हैं, उसी तरह से सूर्य के मिथुन में प्रवेश करने की तिथि को मिथुन संक्रांति कहा जाता है। हिंदी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह वर्ष का तीसरा माह होता है। इस माह में सूर्यदेव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। इस बार सूर्य देव 15 जून 2021 दिन मंगलवार को मिथुन में प्रवेश करने जा रहे हैं। संक्रांति तिथि पर दान-पुण्य और सूर्य पूजा का विशेष महत्व माना गया है। जानते हैं संक्रांति तिथि का महत्व, पूजा विधि और समय।