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Mauni Amavasya 2024: आज मौनी अमावस्या पर बन रहा शुभ योग, जानिए स्नान-दान और पूजा का महत्व

Fri, 09 Feb 2024 12:28 AM IST
आशिकी पटेल पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
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Mauni Amavasya 2024 - फोटो : अमर उजाला
Mauni Amavasya 2024: आज सुबह 8 बजकर 2 मिनट पर मौनी अमावस् आरम्भ होगी और यह 10 फरवरी को सुबह 4 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इसलिए मौनी अमावस्या का स्नान और दान 9 फरवरी को होगा।

मौनी अमावस्या यानी कि मौन रहकर ईश्वर की साधना करने का अवसर। इस तिथि को मौन एवं संयम की साधना, स्वर्ग एवं मोक्ष देने वाली मानी गई है।शास्त्रों में मौनी अमावस्या पर मौन रखने का विधान बताया गया है। यदि किसी व्यक्ति के लिए मौन रखना संभव नहीं हो तो वह अपने विचारों को शुद्ध रखें मन में किसी तरह की कुटिलता नहीं आने दें। आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी वाणी का शुद्ध और सरल होना अति आवश्यक है।

मौनी अमावस्या का धर्म शास्त्रों में बहुत ही खास महत्व माना गया है। इस दिन व्रत रखकर भगवान की पूजा पाठ में मन लगाना चाहिए। संभव हो सके तो इस दिन गंगा में स्नान जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से सभी पाप दूर होते हैं और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

Mauni Amavasya 2024: इस साल कब है मौनी अमावस्या? यहां जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त
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मौनी अमावस्या के दिन बन रहा शुभ योग, जानिए स्नान-दान और पूजा का महत्व - फोटो : अमर उजाला
मौनी अमावस्या के महत्व को इस तरह भी परिभाषित कर सकते हैं कि ध्वनि सतह पर होती है और मौन भीतर होता है, अंतर में। इसलिए सभी प्रकार की ध्वनियों से परे जाकर अंतर यानी शून्य में उतरने की क्रिया मौन कहलाती है। तात्पर्य यह कि यदि सृष्टि का अंश यानी मनुष्य सृष्टि के स्रोत यानी शून्य में रूपांतरित होने की कोशिश करे तब मौन घटित होता है। यही कारण है कि जब कोई साधक मौन की साधना करता है तो वह अपने आसपास ही नहीं, बल्कि सृष्टि में मौजूद तमाम ध्वनियों से परे पहुंचने की कोशिश करता है, क्योंकि ध्वनियों से परे पहुंचे बिना मौन हुआ ही नहीं जा सकता।

अध्यात्म जगत में मौन का सदा से ही अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है, क्योंकि अध्यात्म के शिखर को छूने में इस मौन का प्रमुख योगदान होता है। इसलिए हमारी संस्कृति में मौन को किसी भी व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक शिखर तक पहुंचने का एक सटीक एवं शाश्वत माध्यम माना गया है। यही कारण है कि हमारे तमाम ऋषि-मुनियों और साधु-संतों ने मौन को अपनी आध्यात्मिक साधना का एक महत्वपूर्ण अंग बनाया, इसे प्रतिष्ठित किया।मौनी अमावस्या के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं भगवान शिव की पूजा का विधान है।
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मौनी अमावस्या के दिन बन रहा शुभ योग, जानिए स्नान-दान और पूजा का महत्व - फोटो : अमर उजाला
इस दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देने से भक्त के जीवन में तेज, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है, जबकि गंगा स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ करने के समान फल मिलता है। वहीं पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। वैसे भी हमारी शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार जिह्वा एवं होंठों से किये जाने वाले मंत्रोच्चारण की अपेक्षा मनका मनका फेरने यानी मौन रहकर मंत्र-जाप करने का पुण्य कई गुना अधिक होता है।

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मौनी अमावस्या के दिन बन रहा शुभ योग, जानिए स्नान-दान और पूजा का महत्व - फोटो : अमर उजाला
यदि पूरा दिन मौन-व्रत रखना संभव न हो तो स्नान-दान से पूर्व सवा घंटे का मौन-व्रत रखना चाहिए। यदि यह भी संभव न हो तो कम-से-कम कटु शब्द बोलने से बचना चाहिए और जिनके लिए मौनी अमावस्या का व्रत रखना संभव ही न हो उन्हें इस दिन मीठा भोजन करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु का पूजन करना बेहद शुभ होता है। पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन को बेहद खास माना गया है।

मौनी अमावस्या के दिन सबसे शुभ माना जाने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7 बजकर 5 मिनट से लेकर रात को 11 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगा। इस शुभ योग में मौनी अमावस्या का व्रत करने से आपके पूर्वज प्रसन्न होकर आपको जीवन में सफल और संपन्न होने का आशीर्वाद देते हैं।

Mauni Amavasya 2024: मौनी अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं? जानें यहां
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मौनी अमावस्या के दिन बन रहा शुभ योग, जानिए स्नान-दान और पूजा का महत्व - फोटो : amar ujala
पूजन विधि
मौनी अमावस्या के दिन सुबह सर्वप्रथम व्रत का संकल्प लें फिर नदी, सरोवर, पवित्र कुंड या घर के जलपात्र के जल को माथे से लगाकर प्रणाम करने के बाद ही स्नान करें। तत्पश्चात पात्र में जल और काले तिल लेकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। उसके बाद पीले फूल, केसर, चंदन, घी के दीपक और प्रसाद स्वरूप पीले के मिष्ठान से पूजन करें। इस अवसर पर श्री विष्णु चालीसा का पाठ कर भगवान श्रीहरि एवं भगवान शिव की आरती करें।
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