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Raksha Sutra : जानें कलाई में बांधे जाने वाली इस डोर का क्या है आपकी खुशियों से संबंध?

Sun, 14 Jul 2019 10:23 AM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
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रक्षाकवच है कलाई पर बंधा कलावा - फोटो : Rohit Jha
सनातन धर्म में अनेक रीति-रिवाज़ तथा मान्यताएं हैं, जिनका सिर्फ धार्मिक ही नहीं, वैज्ञानिक पक्ष भी है जो वर्तमान समय में भी एकदम सटीक बैठता है। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान कलावा (रक्षासूत्र, मोली) के बिना संपन्न नहीं होता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करते समय या नई वस्तु खरीदने पर हम कलावा ज़रूर बांधते हैं, ताकि वह हमारे जीवन में शुभता प्रदान करे।
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रक्षा सूत्र बांधने का मंत्र

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रक्षाकवच है कलाई पर बंधा कलावा
कलावा संकल्प, रक्षा एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार कलावा बांधने से त्रिदेव - ब्रह्मा, विष्णु व महेश एवं त्रिदेवियां - लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की असीम कृपा प्राप्त होती है। कलावा बांधने की प्रथा तबसे चली आ रही है, जब दानवीर राजा बली की अमरता के लिए श्री विष्णु अवतार वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। आज भी विद्वान लोग कलावा बांधते वक्त इस मंत्र का उच्चारण करते हैं —  

 येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
 तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
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किस हाथ में कैसे बंधवाएं कलावा

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रक्षाकवच है कलाई पर बंधा कलावा
शास्त्रों के अनुरूप पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए एवं विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधने का विधान है। कलावा बंधवाते समय उस हाथ की मुट्ठी को बंद रखकर दूसरा हाथ सिर पर रखना चाहिए। कलावे का बांधा जाना हमें अपने संकल्प को याद करते रहना और उसकी पूर्ति के लिए प्रयास करते रहना सिखाता है। 
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सौभाग्य ही नहीं सेहत से भी है जुड़ाव

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रक्षाकवच है कलाई पर बंधा कलावा
शरीर विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो कलावा बांधने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है। त्रिदोष -वात, पित्त तथा कफ का शरीर में संतुलन बना रहता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से हाथ में कलावा बंधे होने से व्यक्ति को स्वयं ही परमात्मा द्वारा अपनी रक्षा होने का आभास होता है। जिससे मन में शांति व आत्मबल में वृद्धि होती है। व्यक्ति के मन-मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते।
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