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लक्ष्य हासिल करने के लिए कभी कभी झुकना भी पड़ता है
लंका की ओर बढ़ते समय हनुमान जी को बीच रास्ते में सुरसा नाम की नाग माता ने रोक लिया और उनको खाने की जिद करने लगी। हनुमान जी ने बहुत समझाया पर वो नहीं समझी यहां तक कि हनुमान जी ने वचन भी दे दिया, प्रभु श्री राम का काम करके आने दो, फिर खुद ही आकर आपका आहार बन जाऊंगा, लेकिन सुरसा नहीं मानी।
सुरसा ने हनुमान जी को खाने के लिए जैसे ही अपना शरीर बड़ा किया हनुमान जी अपना शरीर दुगना बड़ा लिया। फिर सुरसा ने अपना शरीर बड़ा लिया, तब हनुमानजी समझ गए कि मामला मुझे खाने का नहीं है, सिर्फ अहम का है। उन्होंने तत्काल सुरसा के बड़े स्वरुप के आगे खुद को छोटा कर लिया ओर उसके मुंह में से घूम कर निकल आए। सुरसा हनुमान जी के इस बुद्धि पराकर्म से काफी खुश हो गई और लंका का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
हनुमान जी के इस उदाहरण से हमें सीख मिलती है कि जहां मामला अहम का हो, वहां बल नहीं, बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए। बड़े लक्ष्य को पाने के लिए अगर कहीं झुकना भी पड़े, झुक जाना चाहिए।