kedarnath temple
भगवान शंकर ने तब बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले। पांडवों को संदेह हो गया था। तब भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाडों पर पैर अपने फैल दिए। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए, पर शंकर जी रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंर्तध्यान होने लगा। तब भीम ने बैल का पीठ का भाग पकड़ लिया।