प्राचीन काल से ही भारत में तीर्थों की धार्मिक महत्ता रही है। इसी महत्व को बनाए रखने के लिए एवं विशाल भारतवर्ष को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए परम पवित्र चार धामों की स्थापना चार दिशाओं में की गई है। उत्तर दिशा में हिमालय की गोद में बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकापुरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी तथा सुदूर दक्षिणी छोर पर स्थित है रामेश्वरम धाम। भौगोलिक दृष्टि से चार धाम एक परिपूर्ण वर्ग का निर्माण करते हैं, जिसमें बद्रीनाथ और रामेश्वरम एक देशांतर पर पड़ते हैं एवं द्वारका और जगन्नाथपुरी एक ही अक्षांश पर पड़ते हैं।
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रामेश्वरम धाम हिन्दुओं के सभी पवित्र तीर्थों में से एक है तथा प्रकृति की सुंदरता के साथ-साथ ही यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम् ज़िले में स्थित एक विशालकाय और भव्य मंदिर है। इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग, द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। पुराणों में रामेश्वरम का नाम गंधमादन बताया गया है।