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Kabirdas Jayanti 2022: आज है कबीर दास जयंती? जानें उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

Tue, 14 Jun 2022 09:49 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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कब है कबीर दास जयंती? जानें तिथि और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य - फोटो : Instagram
Kabirdas Jayanti Date 2022: हर साल ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को संत कबीर दास जी की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष कबीरदास जयंती 14 जून 2022 को मनाई जाएगी। संत कबीरदास के जन्म के विषय में कुछ भी सटीकता से नहीं कहा जाता है। कुछ साक्ष्यों के अनुसार, कबीर दास जी का जन्म काशी में 1398ईं में हुआ था। संत कबीर दास हिंदी साहित्य के ऐसे कवि थे, जिन्होंने समाज में फैले आडंबरों को अपनी लेखनी के जरिए उस पर कुठाराघात किया था। संत कबीरदास जी ने आजीवन समाज में फैली बुराइयों और अंधविश्वास की निंदा करते रहे। कबीरदास जी न सिर्फ एक संत थे बल्कि वे एक विचारक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से जीवन जीने की कई सीख दी हैं। इनके दोहे अत्यंत सरल भाषा में थे, जिसके कारण उन दोहों को कोई भी आसानी से समझ सकता है। आज भी लोग इनके दोहे गुनगुनाते हैं। ऐसे में चलिए कबीर दास जी की जयंती के पावन अवसर पर जानते हैं इनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में... 
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कब है कबीर दास जयंती? जानें तिथि और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य - फोटो : Instagram
कबीर दास जी के जन्म के विषय में कई मतभेद मिलते हैं। कुछ तथ्यों के आधार पर माना जाता है कि इनका जन्म रामानंद गुरु के आशीर्वाद से एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था और लोक-लाज के भय से उसने कबीरदास को काशी के समक्ष लहरतारा नामक तालाब के पास छोड़ दिया था, जिसके बाद उस राह से गुजर रहे लेई और लोइमा नामक जुलाहे ने इनका पालन-पोषण किया। वहीं कुछ विद्वानों का मत है कि कबीरदास जन्म से ही मुस्लिम थे और इन्हें गुरु रामानंद से राम नाम का ज्ञान प्राप्त हुआ था।
 
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कब है कबीर दास जयंती? जानें तिथि और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य - फोटो : pinterest
कबीरदास जी ने अपने दोहों से लोगों के मन में व्याप्त भ्रांतियों को दूर किया और धर्म के कट्टरपंथ पर तीखा प्रहार किया था। इन्होंने समाज को सुधारने के लिए कई दोहे कहे। इसी वजह से ये समाज सुधारक कहलाए। 

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कब है कबीर दास जयंती? जानें तिथि और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य - फोटो : Instagram
उस समय समाज में कई तरह के अंधविश्वास फैले हुए थे। एक अंधविश्वास ये भी कायम था कि काशी में मृत्यु होने वाले के स्वर्ग की प्राप्ति होती है तो वहीं मगहर में मृत्यु होने पर नरक भोगना पड़ता है। लोगों में फैले इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए कबीर जी पूरे जीवन काशी में रहे लेकिन अंत समय मगहर चले गए और मगहर में ही उनकी मृत्यु हुई। 
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कब है कबीर दास जयंती? जानें तिथि और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य - फोटो : Instagram
कहा जाता है कि कबीर जी को मानने वाले लोग हर धर्म से थे, इसलिए जब उनकी मृत्यु हुई, तो उनके अंतिम संस्कार को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों में विवाद होने लगा। कहा जाता है कि इसी विवाद के बीच जब शव से चादर हटाई गई तो वहां पर केवल फूल थे। इन फूलों को लोगों ने आपस में बांट लिया और अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार किया।
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