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Jivitputrika Vrat 2021: आज है संतान प्राप्ति के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें पूजा की विधि

Tue, 28 Sep 2021 07:19 AM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

  • जीवित्पुत्रिका व्रत अश्विन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है।
  • संतान की लंबी आयु, सुखी और आरोग्य जीवन के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाता है।
  • माताएं इस व्रत को निर्जला रहकर करती हैं।
  • जितिया व्रत का पर्व सप्तमी से आरंभ होकर नवमी तिथि तक चलता है।
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जीवित्पुत्रिका व्रत 2021
हिंदू कैलेंडर के हिसाब से प्रत्येक वर्ष अश्विन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। इसे इसे जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत भी कहा जाता है। इस व्रत को माताएं संतान प्राप्ति व अपनी संतान की लंबी आयु की कामना के साथ रखती हैं। यह पर्व पूरे तीन दिन तक चलता है। इसे भी कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। माताएं अपनी संतान के लिए ये व्रत निराहार और निर्जला करती हैं। इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत का पर्व 28 सितंबर से लेकर 30 सितंबर तक चलेगा। जीवत्पुत्रिका व्रत 28 सितंबर को नहाए खाए के साथ आरंभ होगा और 29 सितंबर को पूरे दिन निर्जला उपवास रखा जाएगा। इसके अगले दिन 30 सितंबर को व्रत का पारण होने के साथ ही इस पर्व का समापन किया जाएगा। 


 
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jitiya 2021 - फोटो : social media
जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व
इस व्रत को संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु और सुखी निरोग जीवन की कामना के साथ किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से संतान के ऊपर आने वाले कष्ट दूर होते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण ने अपने पुण्य कर्मों को अर्जित करके उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को जीवनदान दिया था, इसलिए इस व्रत को संतान की रक्षा की कामना के साथ किया जाता है। माना जाता है कि इस व्रत के फलस्वरुप भगवान कृष्ण संतान की रक्षा करते हैं।
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jitiya 2021 - फोटो : social media
जीवित्पुत्रिका व्रत 2021 शुभ मुहूर्त
जीवित्पुत्रिका व्रत 29 सिंतबर अश्विन मास की अष्टमी तिथि को किया जाएगा। 
अश्विन मास कृष्ण पक्ष अष्टमी आरंभ- 28 सितंबर 2021 दिन मंगलवार की शाम को 06 बजकर 16 मिनट से 
अश्विन मास कृष्ण पक्ष अष्टमी समाप्त- 29 सिंतबर 2021 दिन बुधवार को रात 08 बजकर 29 मिनट पर 
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jitiya 2021 - फोटो : social media
जितिया व्रत की विधि-
प्रातः काल जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होने के वदा भगवान सूर्य नारायण को जल दें यदि उनकी प्रतिमा हो तो स्नान कराएं। इसके बाद धूप दीप प्रज्वलित करें। भोग लगाएं व आरती करें। इस व्रत में समप्तमी के दिन भोजन और जल ग्रहण करने के बाद अष्टमी को निर्जला व्रत किया जाता और नवमी तिथि को व्रत का समापन किया जाता है।

जितिया व्रत का पारण तिथि और विधि
जीवित्पुत्रिका व्रत या जितिया व्रत को अगले दिन पारण किया जाता है। इस बार 30 सितंबर दिन गुरुवार को जितिया व्रत का पारण किया जाएगा। इस दिन प्रातः काल स्नानादि करने के बाद पूजन करें और सूर्योदय होने के बाद व्रत का पारण करें।
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