Holashtak 2022:
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विष्णु भक्त प्रह्राद को लगातार 8 दिनों तक दिया गया था कष्ट
होलाष्टक में शुभ या मंगल कार्य ना करने के पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है,जिसमें भक्त प्रह्लाद की अनन्य नारायण भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकश्यप ने होली से पहले के आठ दिनों में प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के जघन्य कष्ट दिए थे। लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे,इसलिए वे हर बार अपने आराध्य की कृपा से सकुशल बच जाते। फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका जल गई लेकिन भक्त प्रहलाद बच गए।अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक भक्त प्रहलाद को कई यातनाएं सहन करनी पड़ी यही कारण है कि भक्ति पर आघात के इन आठ दिनों में नवग्रह भी उग्र रूप लिए रहते है। होलाष्टक में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य,दशमी को शनि,एकादशी को शुक्र,द्वादशी को गुरु,त्रयोदशी को बुध,चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र रहते हैं एवं नकारात्मकता की अधिकता रहती है। यही वजह है कि इस अवधि में किए जाने वाले शुभ कार्यों में अमंगल होने की आशंका बनी रहती है।इन दिनों में व्यक्ति के निर्णंय लेने की शक्ति भी कमजोर हो जाती है।