फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Holashtak 2022: कल से शुरू होंगे होलाष्टक, जानिए 8 दिनों तक क्यों नहीं होते शुभ कार्य, क्या करें और क्या न करें?

Wed, 09 Mar 2022 10:48 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 4
Holashtak 2022: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन,नामकरण और सभी तरह के मांगलिक कार्य या कोई नवीन कार्य शुरू करना वर्जित माना जाता है। - फोटो : istock
Holashtak 2022: कल से होलाष्टक शुरू हो जाएंगे। होली से पहले 8 दिनों तक होलाष्टक रहता है। होलाष्टक को अशुभ माना गया है। इसलिए इन 8 दिनों में कोई भी मांगलिक और शुभ कार्य नहीं किया जाता है। 10 से 17 मार्च तक होलाष्टक रहेगा फिर होलिका दहन और दूसरे दिन होली खेली जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर होलिक दहन के दौरान तक होलाष्टक रहता है। होलाष्टक के आठ दिनों के दौरान पूजा-पाठ और अनुष्ठान का विशेष महत्व होता है,इसमें मंदिर में भगवान कृष्ण की उपासना का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन,नामकरण और सभी तरह के मांगलिक कार्य या कोई नवीन कार्य शुरू करना वर्जित माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं आखिरकार होली से पहले 8 दिन का समय क्यों अशुभ माना जाता है क्या इसके पीछे की पौराणिक कथा... 
विज्ञापन

2 of 4
Holashtak 2022: - फोटो : amar ujala
विष्णु भक्त प्रह्राद को लगातार 8 दिनों तक दिया गया था कष्ट
होलाष्टक में शुभ या मंगल कार्य ना करने के पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है,जिसमें भक्त प्रह्लाद की अनन्य नारायण भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकश्यप ने होली से पहले के आठ दिनों में प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के जघन्य कष्ट दिए थे। लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे,इसलिए वे हर बार अपने आराध्य की कृपा से सकुशल  बच जाते। फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका जल गई लेकिन भक्त प्रहलाद बच गए।अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक भक्त प्रहलाद को कई यातनाएं सहन करनी पड़ी यही कारण है कि भक्ति पर आघात के इन आठ दिनों में नवग्रह भी उग्र रूप लिए रहते है। होलाष्टक में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य,दशमी को शनि,एकादशी को शुक्र,द्वादशी को गुरु,त्रयोदशी को बुध,चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र रहते हैं एवं नकारात्मकता की अधिकता रहती है। यही वजह है कि इस अवधि में किए जाने वाले शुभ कार्यों में अमंगल होने की आशंका बनी रहती है।इन दिनों में व्यक्ति के निर्णंय लेने की शक्ति भी कमजोर हो जाती है।
विज्ञापन

3 of 4
Holika Dahan - फोटो : अमर उजाला
कामदेव हुए थे भस्म
शिव पुराण के अनुसार देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने अपना प्रेम वाण चलाकर शिवजी की तपस्या को भंग कर दिया। इससे महादेव अत्यंत क्रोधित हो गए,उन्होंने अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से कामदेव को भस्म कर दिया। प्रेम के देवता कामदेव के भस्म होते ही सारी सृष्टि में शोक व्याप्त हो गया। अपने पति को पुनः जीवित करने के लिए रति ने अन्य देवी-देवताओं सहित महादेव से प्रार्थना की। प्रसन्न होकर भोले शंकर ने कामदेव को पुर्नजीवन का आशीर्वाद दिया। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को कामदेव भस्म हुए और आठ दिन बाद महादेव से रति को उनके पुर्नजीवन का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
विज्ञापन

4 of 4
होलिका - फोटो : self
होलाष्टक के दौरान क्या न करें
धर्म शास्त्रों में होलाष्टक को शुभ नहीं माना गया है क्योंकि इन 8 दिनों तक भगवान विष्णु के भक्त प्रह्रलाद को तरह-तरह के कष्ट मिले थे। ऐसे में इन 8 दिनों तक विवाह, गृह प्रवेश,मुंडन और अन्य शुभ कार्यो को करने की मनाही होती है। इसके अलावा होलाष्टक के दौरान सगाई,गोद भराई और ग्रह शांति भी न करें।

होलाष्टक के दौरान क्या करें
होलाष्टक के दौरान भगवान की पूजा और आराधना करने का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस दौरान भगवान के भक्त को कष्ट सहना पड़ता है इस दौरान मंत्रों का जाप,वैदिक अनुष्ठान और यज्ञ करने चाहिए ताकि कष्टों से मुक्ति मिल सके। होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप बहुत ही लाभदायक माना गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें