देवी सीता की खोज करने के लिए हनुमान जी अपनी वानर सेना को लेकर चले। लेकिन केवल हनुमान जी ही देवी सीता तक पहुंचने में सफल हुए और इस कार्य में हनुमान जी के सामने यह 8 चुनौतियां सामने आई।
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हनुमान जी की लंका यात्रा की यह 8 बातें सिर्फ हनुमान जी के परमभक्त ही जानते हैं आपको कितना पता है
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हनुमान जी
वानर सहित हनुमान जी जब सागर तट पर पहुंचे तो सागर पार करने का कोई उपाय जब समझ में नहीं आया तब सभी वानर सहित हनुमान जी ने अन्न जल त्यागक देह त्याग का विचार करते हैं क्योकि सभी ने विचार किया कि खानी हाथ लौटने से अच्छा है प्राण त्याग दिए जाएं।
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हनुमान जी
जब हनुमान सहित सभी वानर निराश होकर बैठ गए तब जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्ति और सामर्थ्य की याद दिलाई और कहा कि तुम इतने पराक्रमी हो कि बचपन में ही सूर्य को निगल गए थे तब यह समुद्र तुम्हारे लिए क्या है तुम इस समुद्र को पल भर में पार कर जाओ। इतना सुनते ही हनुमान जी को शाप के कारण भूली शक्ति याद आ गई और हनुमान जी ने अपने शरीर का आकार बढ़ते हुए आकाश को छू लिया। बाल्मिकी रामायण के अनुसार हनुमान जी के शरीर का विस्तार 10 योजन था।
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हनुमान जी
हनुमान जी ने जब अपने शरीर का विस्तार किया और समुद्र पार करने के लिए जैसे ही छलांक लगाई आस-पास के पेड़ उखड़ गए और हवा के वेग से ऐसे उड़े जैसे वह भी हनुमान जी के साथ सागर पार कर जाएंगे।
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हनुमान जी
समुद्र पार करते समय बीच में एक पल के लिए हनुमान जी मैनाक पर्वत पर रुके थे क्यों मैनाक ने हनुमान जी की सेवा में प्रकट होकर सेवा का अवसर देने की प्रार्थना की थी लेकिन भगवान राम के काम में देरी न हो इसलिए हनुमान जी ने मैनाक का सम्मान रखते हुए एक पल को पर्वत पर अपना पांव रखा और आगे बढ़ गए।
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हनुमान जी
सागर पार करते समय हनुमान जी के सामने नाग माता सुरसा प्रकट हुई। सुरसा ने कहा कि अगर तुम मेरे मुख में प्रवेश करके जीवित निकल आओ तो मैं तुम्हें जीवित छोड़ दूंगी। हनुमान जी ने सुरसा के मुंह में प्रवेश किया और सूक्ष्म रूप धारण करके बाहर निकल आए।
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सिंहिका
सुरसा से बचकर आगे बढ़ने पर हनुमान जी को सिंहिका नाम की राक्षसी मिली जो छाया को देखकर शिकार करती थी। इसने हनुमान जी को पकड़कर अपने मुंह में रख लिया। हनुमान जी ने इसके माथे को फाड़ दिया और उससे बाहर निकल आए।
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लंकिनी
हनुमान जी दिन के समय लंका पहुंचे लेकिन लंका में प्रवेश के लिए इन्होंने रात के समय को चुना क्योंकि उस समय हलचल कम रहती है। हनुमान जी रात में जब लंका में प्रवेश करने लगे तब लंका की देवी लंकिनी की नजर उन पर पड़ गई और उन्होंने हनुमान जी को लंका में प्रवेश करने से रोक दिया।
हनुमान जी की लंका यात्रा की यह 8 बातें सिर्फ हनुमान जी के परमभक्त ही जानते हैं आपको कितना पता है
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हनुमान जी
हनुमान जी ने लंकिनी को एक मुक्का मारा जिससे वह अचेत होकर गिर पड़ी और फिर होश आने पर हनुमान जी को प्रणाम किया आज मुझे शाप से मुक्ति मिल गई है और मैं अब लंका छोड़कर जा रही हूं आज से लंका का अंत शुरु हो गया है। इसके बाद हनुमान जी मच्छर के समान रूप बनाकर लंका में प्रवेश कर गए।