महाभारत में द्रौपदी के कई रूप देखने को मिलते हैं। लेकिन चीर हरण से पहले की द्रौपदी और उसके बाद की द्रौपदी के चरित्र में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। चीर हरण की घटना से पहले द्रौपदी आम बहूओं की तरह मर्यादा और शील के साथ व्यवहार करने वाली हैं। लेकिन चीर हरण के बाद द्रौपदी का उग्र रूप सामने आता है और द्रौपदी ऐसे पांच काम करती है जो आज की महिलाएं भी करने से पहले हजार बार सोचेगी।
विज्ञापन
द्रौपदी ने तब 5 बार शर्म छोड़कर लिया था बड़ा फैसला
2 of 6
द्रौपदी वस्त्रहरण
कोई भी स्त्री अपने ऋतुकाल के बारे में आज भी किसी पुरुष से नहीं कहती है। लेकिन द्रौपदी को अपने ऋतुकाल के बारे में कहना पड़ा क्योंकि पांडवों द्वारा द्रौपदी को जुए में हार जाने के बाद दुशासन उन्हें बालों से खींचकर राजसभा में ले जाने लगा। द्रौपदी ने दुशासन से कहा कि वह उन्होंने अभी ऋतु स्नान नहीं किया है इसलिए वह सभा में नहीं जा सकती।
विज्ञापन
द्रौपदी ने तब 5 बार शर्म छोड़कर लिया था बड़ा फैसला
3 of 6
द्रौपदी
दूसरी बार जब पांडवों को चौसर खेलने के लिए बुलाया गया तो द्रौपदी ने शर्म लिहाज को छोड़कर राजसभा में पांडवों के साथ बैठने का निर्णय लिया। उन दिनों चौसर की सभा में महिलाएं नहीं आती थी। लेकिन द्रौपदी ने इस प्रथा का अंत किया।
द्रौपदी ने तब 5 बार शर्म छोड़कर लिया था बड़ा फैसला
4 of 6
द्रौपदी
दुशासन ने द्रौपदी के बाल खींचे थे और चीर हरण करने का प्रयास किया था। द्रौपदी ने इसके लिए भरी राज सभा में कहा कि अब उनके बाल तब तक खुले रहेंगे जब तक इन पर दुशासन की छाती का लहू नहीं मलूंगी।
विज्ञापन
द्रौपदी ने तब 5 बार शर्म छोड़कर लिया था बड़ा फैसला
5 of 6
द्रौपदी
अज्ञातवास के समय द्रौपदी राजा विराट की पत्नी की दासी सैरेन्द्री बनकर रह रही थी। उन दिनों विराट नरेश के साले कीचक ने द्रौपदी को देखा तो कामांध होकर रात के समय अपने कक्ष में बुलाया। द्रौपदी हिम्मत नहीं हारी और चुपके से भीम और अर्जुन को सब हाल कह डाला और कीचक का वध करवा दिया।