भीष्म पितामह
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भीष्म अष्टमी व्रत विधि
भीष्म अष्टमी को प्रातः किसी नदि या सरोवर नें स्नान करना चाहिए। यदि संभव न हो तो घर पर ही स्नान करें।
इस दिन तर्पण करने के बहुत महत्व माना गया है। इस दिन भीष्म पितामह के निमित्त तर्पण करना चाहिए।
स्नान करने के पश्चात हाथ में तिल, जल आदि लेकर आदि लेकर यदि धारण करते हैं तो जनेउ को दाएं कंधे पर लेकर दक्षिणाभिमुख होकर तर्पण करना चाहिए।
तर्पण के समय इस मंत्र का जाप करें।
वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च।
गंगापुत्राय भीष्माय सर्वदा ब्रह्मचारिणे।।
भीष्म: शान्तनवो वीर: सत्यवादी जितेन्द्रिय:।
आभिरभिद्रवाप्नोतु पुत्रपौत्रोचितां क्रियाम्।।
विधि पूर्वक तर्पण करने के बाद पुन: जनेऊ को बाएं कंधे पर ले लें और गंगापुत्र भीष्म को अर्घ्य दें।
पौराणिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति विधिपूर्वक इस दिन भीष्मपितामह के निमित्त तर्पण करता है उसके पूरे वर्ष के पापों का नाश होता है।