वेद भी सत्य का ही उपदेश देते हैं
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सभी प्रणियों को एक समान समझना, ईर्ष्या द्बेश से दूर रहना, शील और लज्जा के गुणों को अपनाना, दुष्कर्मों से दूर रहना, किसी को कष्ट न पहुंचाना, इनद्रियों को वश में रखना, मन की पवित्रता को बनाए रखना, सत्य बोलना, क्षमा करना, साहस और विद्या आदि ये तेरह सत्य धर्म के लक्षण हैं। वेद भी सत्य का ही उपदेश देते हैं। सत्य बोलना सहस्त्रों अश्वमेध यज्ञों के फल के बराबर होता है।