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Amalaki Ekadashi 2021: इस दिन भगवान विष्णु के साथ की जाती है आंवले के वृक्ष की पूजा, जानिए महत्व, तिथि और व्रत विधि

Mon, 01 Mar 2021 11:56 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आमलकी एकादशी 20210 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस बार आमलकी एकादशी 25 मार्च 2021 दिन गुरूवार को पड़ रही है। इस एकादशी को आंवला एकादशी और आमलक्य एकादशी नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विष्णु जी की विधि-विधान से पूजा करने के साथ आंवले के वृक्ष का पूजन भी किया जाता है। आमलकी एकादशी के दिन आंवले का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। आमलकी एकादशी के दिन आंवले के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का पूजन करने से सौ गायों के दान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जानते हैं आमलकी एकदशी व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और व्रत विधि।
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आमलकी एकादशी 20210 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
आमलकी एकादशी तिथि आरंभ, सामपन और व्रत पारणा मुहूर्त

एकादशी तिथि आरंभ- 24 मार्च 2021 दिन बुधवार सुबह को 10 बजकर 32 मिनट से
 
एकादशी तिथि समाप्त- 25 मार्च 2021 दिन बृहस्पतिवार सुबह 09 बजकर 47 मिनट पर
 
द्वादशी तिथि पारणा मुहूर्त- 26 मार्च दिन शुक्रवार सुबह 06 बजकर 53 मिनट से 08 बजकर 12 मिनट तक। 
 
पाराणा अवधि- 02 घंटे 27 मिनट रहेगी।
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आमलकी एकादशी 20210 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : google
आमलकी एकादशी का महत्त्व
पद्म पुराण में उल्लेख के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत नियम और निष्ठा के साथ करने से सैंकड़ों तीर्थों के दर्शन के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। व्यक्ति को सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन आंवले का बहुत महत्व माना गया है। भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करना चाहिए। जो लोग व्रत नहीं रखते हैं उन्हें भी आंवले का सेवन करना चाहिए।
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आमलकी एकादशी 20210 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
आमलकी एकादशी व्रत की पूजा विधि

एकादशी को प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें। 
 
भगवान विष्णु की पूजा आरंभ करें, उनके समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। 
धूप जलाएं और भगवान विष्णु को पुष्प अर्पित करें।
 
यदि आस-पास कोई आंवले का वृक्ष हो तो वहां पर जाकर धूप, दीप, चंदन, रोली, पुष्प, अक्षत आदि से पूजन करें।
 
यदि आंवले का वृक्ष न होत तो भगवान विष्णु को को आंवला अर्पित करें। 

पूजा संपन्न करने के पश्चात विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
 
द्वादशी तिथि यानि एकादशी तिथि के अगले दिन प्रातः उठकर स्नान करने के पश्चात का भगवान विष्णु करें। इसके बाद किसी जरुतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजकर करवाकर कलश, वस्त्र और आंवला आदि दान करके उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें। पारणा मुहूर्त में स्वयं भी भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
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