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Ahoi Ashtami 2021: बच्चों के लिए रख रहीं है अहोई अष्टमी का व्रत, तो न भूलें ये नियम

Wed, 27 Oct 2021 07:46 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अहोई पूजन विधि - फोटो : self
कार्तिक मास में पड़ने वाले अन्य त्योहारों के साथ साथ अहोई अष्टमी का पर्व भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्तिक मास के अष्टमी को अहोई माता का व्रत किया जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए रखती हैं। अहोई अष्टमी निःसंतान दम्पत्ति भी संतान प्राप्ति की कामना के लिए रखते हैं। इस दिन माताएं पूरा दिन उपवास रख कर फिर विधि-विधान के साथ अहोई माता की पूजा अर्चना करती हैं। 

अहोई  व्रत को करने के अपने अलग ही नियम हैं। यह व्रत निर्जला रहा जाता है।हिन्दू मान्यता के अनुसार गौरी पुत्र गणेश सबसे वंदनीय हैं, इसलिए अहोई माता की पूजा आरंभ करने से पहले गणेश जी की पूजा करनी चाहिये। इस बार अहोई अष्टमी पर्व 28 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस बार अहोई अष्टमी को गुरु पुष्य नक्षत्र भी पड़ रहा है, जो बहुत ही शुभ फल देने वाला है। ऐसे में इस बार अहोई अष्टमी व्रत रहने वाली महिलाओं को पूरे नियम के साथ व्रत रखना चाहिए और किसी भी प्रकार की गलती करने से बचना चाहिए। 
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ganesh - फोटो : Istock
आइए जानते हैं अहोई अष्टमी का व्रत रखने के लिए किन नियमों का महिलाओं को ध्यान रखना चाहिए-

सर्वप्रथम करें गणेश पूजन 

अहोई अष्टमी के दिन वैसे तो अहोई माता की पूजा की जाती है लेकिन जैसा की आप सब जानते हैं श्रीगणेश सभी देवताओं में पूजनीय है, इसलिए सबसे पहले गणेश पूजन करना चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तारों को देखकर खोलें व्रत 

आमतौर पर जो भी व्रत किए जाते हैं वो चंद्रमा के दर्शन और उन्हे अर्घ्य देने के बाद पूर्ण होते हैं लेकिन अहोई अष्टमी पर व्रत तारों को देखकर खोला जाता है। तारें निकलने के बाद अहोई माता की पूजा की जाती है। 

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राधाकुंड पर अहोई अष्टमी की कथा सुनतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
सात प्रकार के अनाज जरूरी 

अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनते समय हाथ में 7 प्रकार के अनाज होने चाहिए जिसे पूजा के बाद गाय को खिलाना अनिवार्य है। 
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संतान की तरक्की के लिए राशि अनुसार अहोई अष्टमी पर करें ये उपाय - फोटो : istock
पूजा के दौरान बच्चों को जरूर बैठाएं 
 
अहोई अष्टमी का व्रत बच्चों के लिए किया जाता है और मान्यता है कि पूजा के समय बच्चों का साथ जरूर बिठाना चाहिए। चूंकि इस व्रत को संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है, इसलिए पूजा के उपरांत माता को भोग लगाने के बाद प्रसाद अपने बच्चों को जरूर दें। 
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दान
बड़े बुजुर्गों के लिए बायना निकालें 

अहोई अष्टमी का एक नियम यह भी है की इस दिन अपने सास-ससुर के लिए बायना जरूर निकालें। यदि आपके सास-ससुर नहीं हैं या दूर रहते हैं तो इसे आप घर के पास रहने वाले किसी बुजुर्ग को भी दे सकते हैं। 
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अहोई अष्टमी - फोटो : self
पेड़ पौधे न उखाड़ें 

वैसे तो दिन ढलते पेड़ पौधे या फूल नहीं तोड़ने चाहिए लेकिन अहोई अष्टमी के दिन का एक प्रमुख नियम यह भी है कि इस दिन पेड़ पौधों को नहीं उखाड़ना चाहिये। हमारे सनातन धर्म में पेड़ पौधों या वृक्षों को संतान का रूप माना जाता है, इसलिए इस दिन पेड़ पौधे तोड़ना वर्जित है।  
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