मानसी श्री
Pitru Paksha 2025: ब्रह्म पुराण के अनुसार, श्राद्ध न करने से पितृगणों को दुख तो होता ही है, साथ में श्राद्ध न करने वालों को भी कष्टों का सामना करना पड़ता है। श्राद्ध पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक पितृगण पृथ्वी लोक पर अपने गोत्र परिवार में अनेक रूप से विचरण करते हुए स्वजनों से तर्पण की अभिलाषा करते हैं। इसलिए भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या तक पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान आदि करने का विधान है। श्राद्ध कर्म की आवश्यकता के संबंध में शास्त्रों में बहुधा प्रमाण मिलते हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार, श्राद्ध न करने से पितृगणों को दुख तो होता ही है, साथ में श्राद्ध न करने वालों को भी कष्टों का सामना करना पड़ता है।