धर्मग्रंथों में कहा गया है कि-'श्रावणे पूजयेत शिवम्'। अर्थात श्रावण मास में शिव पूजा विशेष रूप से फलदाई है। भोले भंडारी थोड़ी सी भक्ति करने से जल्दी ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। एक श्लोक के अनुसार 'वेदः शिवः,शिवः वेदः'अर्थात वेद ही शिव हैं और शिव ही वेद हैं। काल के भी महाकाल भगवान शिव के बारे में लिखा है कि- 'सभी देवताओं की आत्मा में रूद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रूद्र की आत्मा हैं'। कहा गया है, ''रुतम-दुःखम द्रावयति-नाशयतीति रुद्रः' यानि भगवान आशुतोष सभी दुखों को नष्ट कर देते हैं। भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र का जिक्र शिव पुराण में भी कई जगह किया गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेल पत्तों के अलावा शिवजी को पांच दूसरे पत्ते भी खूब पसंद हैं। आइए जानते हैं इस सावन बेलपत्र के साथ कौन से पत्ते चढ़ाकर भगवान को शीघ्र प्रसन्न किया जा सकता है।