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Nag panchami 2024: पौराणिक काल के इन नागों की वर्तमान में भी होती है पूजा

Fri, 09 Aug 2024 03:39 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Nag panchami 2024: आज यानी शुक्रवार, 9 अगस्त के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। 
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Nag panchami 2024 - फोटो : freepik
Nag panchami 2024: आज यानी शुक्रवार, 9 अगस्त के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करना अति शुभ होता है। माना जाता है कि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा अर्चना करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। साथ ही मन से सभी तरह के डर भय दूर होते हैं। ये दिन सभी शिव भक्तों के लिए भी बेहद खास होता है।

नाग महादेव के गले की शोभा होते हैं। ऐसे में शिव और नाग दोनों की पूजा करने पर जीवन में खुशियों का वास होता है। वहीं भारत में नाग पंचमी के दिन को अलग-अलग मान्यताओं के साथ मनाया जाता है। इस दिन तमाम क्षेत्रों में नाग देवता को दूध पिलाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल नाग पंचमी पर करीब 500 साल बाद दुर्लभ संयोग बना हुआ है। ऐसे में हम आपको पौराणिक काल के उन नागों के बारे में बताना वाले हैं, जिनती आज भी पूजा की जाती है। आइए इसके बारे में जान लेते हैं।
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Nag panchami 2024 - फोटो : istock
कर्कोटक नाग
कर्कोटक नाग को लेकर ऐसी मान्यता है कि एक बार मां कद्रू ने नागों को यज्ञ में भस्म होने का शाप दिया था। इस शाप के बाद कुछ लोग तप करने चले गए। वहीं ब्रह्माजी के कहने पर कर्कोटक ने शिवलिंग की स्तुति भी की थी। इस बात से प्रसन्न भगवान शिव जी ने उन्हें कहा कि, जो नाग धर्म का आचरण करते हैं, उनका विनाश नहीं होगा। तभी से लेकर ऐसी मान्यता है कि कर्कोटक नाग उसी शिवलिंग में प्रवेश कर गए थे।
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Nag panchami 2024 - फोटो : istock
शेषनाग 
नाग पंचमी के शुभ दिन पर शेषनाग की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को बुद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन से पता चलता है कि शेषनाग ने जब देखा कि उनकी माता जी और भाईयों ने ऋषि कश्यप की दूसरी पत्नी के साथ छल किया है, तो उन्होंने सब कुछ छोड़कर तपस्या करना शुरू कर दिया। शेषनाग की कठोर तपस्या से प्रसन्न हुए ब्रह्मा जी ने उन्हें एक वरदान दिया। ये वरदान था कि तुम्हारी बुद्धि कभी धर्म से विचलित नहीं होगी। 

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Nag panchami 2024 - फोटो : istock
तक्षक नाग
हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार तक्षक नाग महाभारत के महाकाव्य के महत्वपूर्ण पात्रों में से एक है। कहा जाता है कि श्रृंगी ऋषि के शाप की वजह से तक्षक नाग ने राजा परीक्षित को डसा था। इसके बाद उनकी मृत्यु भी हो गई थी। फिर तक्षक नाग से बदला लेने के लिए राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने सर्प यज्ञ किया। 

इस यज्ञ में इतनी शक्ति थी कि अनेक सर्प आ आकर उसमें गिरने लगे। फिर जैसे ही तक्षक नाग का नाम लेकर इस यज्ञ में आहुति डाली, तभी तक्षक नाग देवलोक से यज्ञ कुंड में गिरने लगे। माना जाता है कि जैसे ही तक्षक नाग यज्ञ कुंड में गिरने लगे उसी समय आस्तिक ऋषि ने अपने मंत्रों के जाप से उन्हें आकाश में स्थिर कर दिया। फिर यज्ञ को रोका गया, और तक्षक नाग के प्राण बच गए।
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Nag panchami 2024 - फोटो : freepik
वासुकि नाग
धार्मिक मान्यताओं के वासुकि नाग को नागों का राजा माना जाता है। ये देवों के देव महादेव के गले की शोभा को बढ़ाते हैं। कई ग्रंथों में वासुकि नाग के अध्ययन से पता चलता है कि नागों की इस प्रजाति को महर्षि कश्यप व कद्रू की संतान माना गया है। वहीं ये भी कहा जाता है कि जब माता कद्रू ने नागों को सर्प यज्ञ में भस्म होने का शाप दिया था, तब नागों की रक्षा के लिए वासुकि चिंतित हुए थे। उनकी चिंता को देखते हुए एलापत्र नामक नाग ने उन्हें कहा कि आपकी बहन जरत्कारु से उत्पन्न पुत्र ही सर्प यज्ञ रोक पाएंगे।

एलापत्र नाग की बात सुनकर नागराज वासुकि ने अपनी बहन का विवाह ऋषि जरत्कारु से करवा दिया था। विवाह के कुछ समय बाद जरत्कारु ने आस्तीक नामक विद्वान पुत्र को जन्म दिया। फिर आस्तीक ने ही अपने प्रिय वचन से राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ को बंद करवाया था। 
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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