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Nag Panchami 2020: जानें कैसे हुई थी नागों की उत्पत्ति, किसकी संतान है नाग

Sat, 25 Jul 2020 12:10 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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नाग पंचमी 2020 - फोटो : Rohit Jha
नाग पंचमी 25 जुलाई को है। सावन का यह प्रमुख पर्व है नाग देवताओं को समर्पित है। इस दिन महिलाएं नागपंचमी का व्रत रखती हैं और नाग देवताओं से अपने सौभाग्य तथा परिजनों की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगती हैं। नाग पंचमी के व्रत से कुंडली में बनने वाले कालसर्प दोष एवं सर्पदंश के भय से भी मुक्ति मिलती है। नाग पंचमी पर्व हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जिसका हमारे पौराणिक शास्त्रों में वर्णन मिलता है। 
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nag panchami
महाभारत के अनुसार, महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थीं। इनमें से कद्रू भी एक थी। कद्रू ने अपने पति महर्षि कश्यप की बहुत सेवा की, जिससे प्रसन्न होकर महर्षि ने कद्रू को वरदाने मांगने के लिए कहा। कद्रू ने कहा कि एक हजार तेजस्वी नाग मेरे पुत्र हों। महर्षि कश्यप ने वरदान दे दिया, उसी के फलस्वरूप नाग वंश की उत्पत्ति हुई।
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nag panchami 2020 - फोटो : nag panchami 2020
महर्षि कश्यप की एक अन्य पत्नी का नाम विनता था। पक्षीराज गरुड़ विनता के ही पुत्र हैं। एक बार कद्रू और विनता ने एक सफेद घोड़ा देखा। उसे देखकर कद्रू ने कहा कि इस घोड़े की पूंछ काली है और विनता ने कहा कि सफेद। इस बात पर दोनों में शर्त लग गई। तब कद्रू ने अपने नाग पुत्रों से कहा कि वे अपना आकार छोटा कर घोड़े की पूंछ से लिपट जाएं, जिससे उसकी पूंछ काली नजर आए और वह शर्त जीत जाए। कुछ सर्पों ने ऐसा करने से मना कर दिया। 

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nag panchami
तब कद्रू ने अपने पुत्रों को श्राप दे दिया कि तुम राजा जनमेजय के यज्ञ में भस्म हो जाओगो। श्राप की बात सुनकर सांप अपनी माता के कहे अनुसार उस सफेद घोड़े की पूंछ से लिपट गए जिससे उस घोड़े की पूंछ काली दिखाई देने लगी। शर्त हारने के कारण विनता कद्रू की दासी बन गई।
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नाग पंचमी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने से नाग काटने का भय दूर होता है दूसरा इससे कालसर्प और सर्पयोग का अशुभ प्रभाव भी दूर  होता है। नाग पंचमी तिथि को कुश जो एक प्रकार का घास होती है उससे नाग बनाकर दूध, घी, दही से इनकी पूजा की जाती है तो नागराज वासुकी प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इससे व्यक्ति पर नाग देवता की कृपा होती है।
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