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Masik Shivratri 2022: आज है नए साल की पहली मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा-विधि

Sat, 01 Jan 2022 12:29 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मासिक शिवरात्रि - फोटो : istock
Masik Shivratri 2022:  आज साल 2022 का प्रथम दिन मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जा रहा है। आज के दिन भगवान शिव के विशेष पूजन का संयोग है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, शिवरात्रि के इस व्रत को कृष्ण पक्ष के दौरान चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि के रूप में जाना जाता है। शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का महान पर्व है। मासिक का अर्थ है 'महा या मास' और शिवरात्रि का अर्थ है 'भगवान शिव की रात'। भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में भगवान शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। मान्यता है कि शिव लिंग का सबसे पहले पूजन भगवान विष्णु और ब्रह्माजी ने किया था। मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव की कृपा का पालन करने से मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से असंभव और कठिन कार्यों को पूरा किया जा सकता है। आइए जानते हैं मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि 
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मासिक शिवरात्रि - फोटो : istock
मासिक शिवरात्रि तिथि
चतुर्दशी तिथि आरंभ:  1 जनवरी 2022, शनिवार,  प्रात:  07:17 मिनट से 
चतुर्दशी तिथि समाप्त:  2 जनवरी 2022, रविवार, प्रात: 03: 41 मिनट पर 
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मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि  पूजा मुहूर्त
पूजा मुहूर्त आरंभ:  01 जनवरी, शनिवार रात्रि 11: 58 मिनट से 
पूजा मुहूर्त समाप्त:  01 जनवरी, शनिवार रात्रि 12: 52 मिनट तक 

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मासिक शिवरात्रि - फोटो : SOCIAL MEDIA
मासिक शिवरात्रि का महत्व 
कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत शक्तिशाली और शुभ माना जाता है और ऐसा करने से स्त्री-पुरुष का जीवन बेहतर होता है।  मान्यता है कि शिव मंत्र ॐ  नमः शिवाय का पूरे दिन और रात जप करने से व्यक्ति की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। जो भक्त इस दिन उपवास करता है, उसे  मोक्ष, मुक्ति की प्राप्ति होती है और वह स्वस्थ और समृद्ध जीवन व्यतीत करता है।
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मासिक शिवरात्रि - फोटो : self
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
  • सर्वप्रथम सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहने। 
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। 
  • अगर घर में शिवलिंग है तो शिवलिंग का गंगा जल, दूध, आदि से अभिषेक करें। 
  • बेल पत्र चढ़ाए।  
  • भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की पूजा अर्चना भी करें। 
  • भगवान भोले और मां पार्वती को भोग लगाए।  
  • भोलेनाथ का अधिक से अधिक ध्यान करें।  
  • ऊॅं नम: शिवाय मंत्र का जप करें। 
  • हवन करें फिर भगवान शिव की आरती करें।  
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