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Mahashivratri 2021: महाशिवरात्रि पूजा में भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से पहले जान लें ये नियम

Wed, 10 Mar 2021 07:52 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का पावन पर्व है। इस दिन शिवभक्त विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। शिव को बेल पत्र बेहद प्रिय है। बेलपत्र अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि बेलपत्र को शिवजी को चढ़ाने से दरिद्रता दूर होती है और व्यक्ति सौभाग्यशाली बनता है। इन कारणों से शिवपूजा में बेलपत्र अर्पित किया जाता है। लेकिन भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से पहले इससे जुड़े कुछ विशेष नियमों को जान लेना आवश्यक होता है। आइए जानते हैं भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : SOCIAL MEDIA
भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते समय सबसे पहले बेलपत्र की दिशा का ध्यान रखना जरूरी होता है। भगवान शिव को हमेशा उल्टा बेलपत्र यानी चिकनी सतह की तरफ वाला भाग स्पर्श कराते हुए ही बेलपत्र चढ़ाएं। 
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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : अमर उजाला
जब आप भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाते हैं तो बेलपत्र को हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से चढ़ाएं। 

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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : Social media
शिव जी को बिल्वपत्र अर्पण करने के साथ-साथ जल की धारा जरूर चढ़ाएं।
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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : Shivharsh Dwivedi
बेलपत्र की तीन पत्तियों वाला गुच्छा भगवान शिव को चढ़ाया जाता है और माना जाता है कि इसके मूलभाग में सभी तीर्थों का वास होता है।
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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : Social Media
बेलपत्र की तीन पत्तियां ही भगवान शिव को चढ़ती है। कटी-फटी पत्तियां कभी न चढ़ाएं।
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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : Mahakal Mandir Live
बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता है। पहले से चढ़ाया हुआ बेलपत्र भी फिर से धोकर चढ़ाया जा सकता है।

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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : amar ujala
कुछ तिथियों को बेलपत्र तोड़ना वर्जित होता है। जैसे कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसे में पूजा से एक दिन पूर्व ही बेल पत्र तोड़कर रख लिया जाता है।
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महाशिवरात्रि 2021: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाने के नियम - फोटो : Social media
मां पार्वती से भी है बेल पत्र का संबंध
बेल वृक्ष की उत्पत्ति के संबंध में 'स्कंदपुराण' में एक कथा है कि एक बार देवी पार्वती ने अपने ललाट से पसीना पौंछकर फेंका,जिसकी कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, जिससे बेल वृक्ष की उत्पत्ति हुई। इस वृक्ष की जड़ों में गिरिजा, तना में महेश्वरी, शाखाओं में दक्षयायनी, पत्तियों में पार्वती, फूलों में गौरी का वास माना गया है।
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