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Janmashtami 2020: ये हैं भगवान श्रीकृष्ण की वो दस लीलाएं जिन्हें आपको जानना चाहिए

Tue, 11 Aug 2020 02:30 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2020 - फोटो : अमर उजाला
Janmashtami 2020: भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी हर साल भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर होती है। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त इस अवसर पर उनकी आराधना में उपवास करते हैं। बाल गोपाल के लिए झूला सजाते हैं और उन्हें 56 भोग आदि का प्रसाद चढ़ाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण 16 कलाओं में निपुण थे और उनकी लीलाएं भी अमर हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर हम आपको प्रभु श्रीकृष्ण दस प्रमुख लीलाएं बता रहे हैं जो इस प्रकार हैं:-
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कंस - फोटो : blog.sagarworld.com
श्री कृष्ण ने कंस के कारावास में जन्म लिया और इनका जन्म होते ही कारावास के दरवाजे खुल गए और प्रहरी गहरी नींद में सो गए। साथ ही आकाशवाणी भी हुई कि बच्चे को नंदगांव में नंदराय जी के घर पहुंचा दो और नंदराय की नवजात कन्या को लेकर आ जाओ। यह श्री कृष्ण के महामानव होने का पहला संकेत था।
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मंचन: कंस के साथ संवाद करते कृष्ण और बलराम - फोटो : Amar Ujala
कंस मामा को जब कृष्ण जन्म की सूचना मिली तो पूतना नाम की राक्षसी को कृष्ण को मारने के लिए भेजा। पूतना ने कृष्ण को चुरा लिया और अपने वक्ष पर जहर लगाकर उन्हें अपना दूध पिलाने लगी। श्री कृष्ण ने पूतना के वक्ष स्थल से उसके प्राण ही खींच लिए और विशालकाय राक्षसी खुद मृत्यु को प्राप्त हो गई।

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भगवान श्रीकृष्ण - फोटो : अमर उजाला
एक दिन खेल खेल में श्री कृष्ण यमुना नदी में कूद पड़े और पहुंच गए कालिया नाग के सामने। कालिया का वध कृष्ण करने ही वाले थे कि नाग कन्याएं प्राण की रक्षा की प्रार्थना करने लगी। श्री कृष्ण ने कालिया को नंद गांव से दूर जाने के लिए कह कर माफ कर दिया।
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
इंद्र द्वारा मूसलाधार बरसात किए जाने पर नंदगांव के पशुओं और लोगों की रक्षा के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया और कई दिनों तक सक कुछ सामान्य चलता रहा तब इंद्र को माफी मांगने के लिए श्री कृष्ण के सामने आना पड़ा।
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
कंस के पहलवानों को पराजित करके कंस का वध करना किसी सामान्य व्यक्ति के वश की बात नहीं थी। जैसे ही श्री कृष्ण ने कंस का वध किया चारों दिशों से श्री कृष्ण के जयकारे गूंज उठे।
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
श्री कृष्ण के गुरू संदीपिनी के पुत्र की वर्षो पहले सागर में डूब जाने के कारण मृत्यु हो चुकी थी। गुरू दक्षिणा देने के समय श्री कृष्ण ने गुरू के मन की बात जान ली और उनके पुत्र को वापस जीवित करके उन्हें लौटा दिया। जब गुरू ने अपने पुत्र को जीवित देखा तो उन्हें यकीन हो गया कि श्री कृष्ण मनुष्य देह धारण किए हुए वास्तव में परमात्मा हैं।

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महाभारत में कृष्ण लीला
चीर हरण के समय द्रौपदी ने श्री कृष्ण का ध्यान किया था और द्रौपदी की साड़ी इतनी लंबी होती चली गई कि दुशासन थक कर बैठ गया। इस तरह श्री कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई। द्रौपदी और श्री कृष्ण की इस लीला से कौरवों की पूरी सभा ने श्री कृष्ण को भगवान रूप में जाना।

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महाभारत गीता उपदेश
पांडवों के दूत बनकर जब श्री कृष्ण दुर्योधन के पास पहुंचे तो दुर्योधन ने श्री कृष्ण को बंदी बनाने का आदेश दिया। इस समय श्री कृष्ण ने अपना दिव्य रूप धारण करके पूरी सभा को हैरान कर दिया। इस समय भीष्म और विदुर ने श्री कृष्ण को विष्णु रूप में देखा।

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महाभारत
महाभारत युद्ध के दौरान हर दिन मूंगफली खाकर युद्ध में मरने वालों की संख्या की भविष्यवाणी करना यह भी बताता है कि श्री कृष्ण मानव नहीं महामानव हैं।
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महाभारत
श्री कृष्ण की सबसे भव्य लीला थी उनका विराट रूप धारण करके अर्जुन को जीवन और मृत्यु के रहस्य का बोध करना। श्री कृष्ण का विराट रूप साक्षात् उनके परब्रह्म परमेश्वर होने का सबूत देता है।
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