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Hartalika Teej 2024: पति की दीघार्यु और तरक्की के लिए हरतालिका तीज पर करें गौरी-शंकर के इन मंत्रों का जाप

Tue, 27 Aug 2024 07:24 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Hartalika Teej 2024 - फोटो : अमर उजाला
Hartalika Teej 2024 Mantra: भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इस साल 6 सितंबर 2024 को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, तरक्की, अच्छे स्वास्थ्य और रिश्तों में मजबूती के लिए उपवास रखती हैं। इस दौरान भगवान शिव और देवी पार्वती की विधि अनुसार पूजा की जाती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं कुंवारी कन्याएं भी इस तिथि पर योग्य वर के लिए व्रत रखती हैं।

इस साल हरतालिका तीज पर 3 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिनमें रवि योग, शुक्ल योग और ब्रह्म योग का नाम शामिल है। इन योग में शिव जी की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है। वहीं पूजा में कुछ खास मंत्रों का जाप करने से वैवाहिक जीवन में भी खुशियां बनी रही हैं। ऐसे में आइए इन मंत्रों के बारे में जान लेते हैं।
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Hartalika Teej 2024 - फोटो : freepik
पति की दीघार्यु के लिए मंत्र
नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।
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Hartalika Teej 2024 - फोटो : istock
सिंदूर अर्पित करने का मंत्र
सिंदूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्।।

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Hartalika Teej 2024 - फोटो : freepik
भगवान शिव का मंत्र
ॐ  नम: शिवाय
ॐ महेश्वराय नमः
ॐ पशुपतये नमः
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Hartalika Teej 2024 - फोटो : istock
सौभाग्य प्राप्ति मंत्र
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
पुत्र-पौत्रादि समृद्धि देहि में परमेश्वरी।।
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Hartalika Teej 2024 - फोटो : istock
माता पार्वती का मंत्र
ॐ पार्वत्यै नमः
ॐ  उमाये नमः
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
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Hartalika Teej 2024 - फोटो : freepik.com
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
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Hartalika Teej 2024 - फोटो : freepik
शिव जी की आरती 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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