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Hartalika Teej 2020: हरतालिका तीज व्रत कथा के बिना अधूरा होता है ये उपवास, जानें व्रत कथा

Fri, 21 Aug 2020 07:56 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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happy hartalika teej - फोटो : अमर उजाला
Hartalika Teej 2020: आज हरतालिका तीज व्रत है। हर साल यह त्योहार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत में महिलाएं माता गौरी से सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मांगती हैं। इसलिए विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह कठिन होता है, क्योंकि इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं। आइए जानते हैं हरतालिका तीज का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत कथा..
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happy hartalika teej
हरतालिका तीज का मुहूर्त
हरतालिका पूजा मुहूर्त: 5:53 am से 8:29 am
प्रदोष काल हरतालिका पूजा मुहूर्त: 6:54 pm से 9:06 pm
तृतीया तिथि प्रारंभ - 2:13 am अगस्त 21, 2020
तृतीया तिथि समाप्त - 11.02 pm अगस्त 21, 2020
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हरतालिका तीज 2020
हरतालिका तीज पूजा विधि
  • सुबह जल्दी उठें और स्नानादि कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • अब बालू रेत से भगवान गणेश, शिव जी और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं। 
  • एक चौकी पर अक्षत (चावल) से अष्टदल कमल की आकृति बनाएं।
  • एक कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, अक्षत, सिक्के डालें।
  • उस कलश की स्थापना अष्टदल कमल की आकृति पर करें।
  • कलश के ऊपर आम के पत्ते लगाकर नारियल रखें। 
  • चौकी पर पान के पत्तों पर चावल रखें।
  • माता पार्वती, गणेश जी, और भगवान शिव को तिलक लगाएं। 
  • घी का दीपक, धूप जलाएं।
  • उसके बाद भगवान शिव को उनके प्रिय बेलपत्र धतूरा भांग शमी के पत्ते आदि अर्पित करें।
  • माता पार्वती को फूल माला चढ़ाएं गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।
  • भगवान गणेश, माता पार्वती को पीले चावल और शिव जी को सफेद चावल अर्पित करें
  • पार्वती जी को शृंगार का सामान भी अवश्य अर्पित करें।
  • भगवान शिव औऱ गणेश जी को जनेऊ अर्पित करें। और देवताओं को कलावा (मौली) चढ़ाएं।
  • हरितालिका तीज की कथा सुनें। 
  • पूरी पूजा विधिवत् कर लेने के बाद अंत में मिष्ठान आदि का भोग लगाएं और आरती करें।  

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चंद्रमा - फोटो : Pixabay
चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
तीज पर संध्या को पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है। फिर उन्हें भी रोली, अक्षत और मौली अर्पित करें। चांदी की अंगूठी और गेंहू के दानों को हाथ में लेकर चंद्रमा के अर्ध्य देते हुए अपने स्थान पर खड़े होकर परिक्रमा करें। 
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पार्वती और शिव - फोटो : google
हरतालिका तीज की पौराणिक कथा
हरतालिका का शाब्दिक अर्थ की बात करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है हरत और आलिका, हरत का अर्थ होता है अपहरण और आलिका अर्थात् सहेली, इस संबंध में एक पौराणिक कथा मिलती है जिसके अनुसार पार्वती जी की सखियां उनका अपहरण करके जंगल में ले गई थी। ताकि पार्वती जी के पिता उनका विवाह इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न कर दें। अपनी सखियों की सलाह से पार्वती जी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की अराधना की। भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। पार्वती जी के तप से खुश होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था।
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