अंगारकी गणेश चतुर्थी 2021
गणेश जी दिव्य वस्त्र धारण कर रखे थे। उनके मस्तक पर चंद्रमा शोभायमान था। उनके हाथ में अनेकों प्रकार के आयुध सुशोभित हो रहे थे। उनकी सूंड सुंदर थी मुख में एक दांत शोभायमान हो रहा था। शूर्पसदृश्य उनके बड़े-बड़े कान कुंडलों से सुशोभित हो रहे थे। उनका श्रीविग्रह करोड़ों सूर्य की आभा वाला और अनेक प्रकार के अलंकारों से अलंकृत था। अपने इष्टदेव भगवान गणेश के सुंदरस्वरूप को सामने विद्यमान देखकर वह बालक उठकर उनके चरणों में गिर पड़ा और उन जगदीश्वर श्री गणेश की स्तुति करने लगा। भौम को हर प्रकार से स्तुति करते हुए देख भगवान गणेश अत्यंत प्रसन्न हुए और मधुर वाणी से बोले वत्स ! मैं तुम्हारी उग्र तपस्या, भक्ति और स्तुति से मैं बहुत प्रसन्न हूं। बाल्यवस्था होते हुए भी तुममें बहुत धैर्य है। मैं तुम्हें वांछित वर देता हूँ।