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Angarki Chaturthi 2021: अंगारकी गणेश चतुर्थी आज, जानिए महत्व और चतुर्थी व्रत कथा

Tue, 02 Mar 2021 03:26 PM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
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अंगारकी गणेश चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay
Angarki Sankashti Chaturthi 2021 Pooja Vidhi Significance Shubh Muhurat: सभी प्राणियों की जन्मकुंडली में मांगलिक अथवा मंगल ग्रह से सम्बंधित दोषों से मुक्ति दिलाने वाली अंगारकी गणेश चतुर्थी का पर्व आज ( 2 मार्च 2021) मनाया जा रहा है।  गणेश पुराण के उपासना खंड में ब्रह्मा जी द्वारा कहीं गई कथा के अनुसार पृथ्वी पुत्र भौम ने नर्मदा नदी के किनारे पद्मासन लगाकर भगवान गणेश की घोर तपस्या आरम्भ करते हुए उनके श्रेष्ठ मंत्रों का जप करने लगे। निराहार रहते हुए उनका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया था। इस प्रकार हजारों वर्ष तक कठोर तप करने के बाद चतुर्थी तिथि को जब स्वच्छ चंद्रमा उदय हुए तो उस समय गणेशजी ने भौम को अपने दस भुजाओं वाले स्वरूप का दर्शन कराया। 
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अंगारकी गणेश चतुर्थी 2021
गणेश जी दिव्य वस्त्र धारण कर रखे थे। उनके मस्तक पर चंद्रमा शोभायमान था। उनके हाथ में अनेकों प्रकार के आयुध सुशोभित हो रहे थे। उनकी सूंड सुंदर थी मुख में एक दांत शोभायमान हो रहा था। शूर्पसदृश्य उनके बड़े-बड़े कान कुंडलों से सुशोभित हो रहे थे। उनका श्रीविग्रह करोड़ों सूर्य की आभा वाला और अनेक प्रकार के अलंकारों से अलंकृत था। अपने इष्टदेव भगवान गणेश के सुंदरस्वरूप को सामने विद्यमान देखकर वह बालक उठकर उनके चरणों में गिर पड़ा और उन जगदीश्वर श्री गणेश की स्तुति करने लगा। भौम को हर प्रकार से स्तुति करते हुए देख भगवान गणेश अत्यंत प्रसन्न हुए और मधुर वाणी से बोले वत्स ! मैं तुम्हारी उग्र तपस्या, भक्ति और स्तुति से मैं बहुत प्रसन्न हूं। बाल्यवस्था होते हुए भी तुममें बहुत धैर्य है। मैं तुम्हें वांछित वर देता हूँ। 
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गणेश जी के इस प्रकार वचनों को सुनते हुए भूमिपुत्र ने कहा हे स्वामी ! आपके दर्शन से मेरी दृष्टि धन्य हो गई। मेरा जन्म लेना भी धन्य हो गया। मेरा ज्ञान मेरा कुल और पर्वतों सहित यह मेरी माता पृथ्वी भी धन्य हो गई। मेरी यह संपूर्ण तपस्या भी धन्य हो गई जो मैंने आप अखिलेश का दर्शन प्राप्त किया। हे देव ! आप मुझपर प्रसन्न हैं तो मेरा नाम त्रैलोक्य में कल्याणकारक के रूप में विख्यात हो जाय। हे विभो ! चतुर्थी तिथि को मुझे आपका दर्शन प्राप्त हुआ है अतः यह तिथि सम्पूर्ण संकटों को हरने वाली तथा सभी कामनाओं की पूर्ति कराने वाली हो।

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गणेश चतुर्थी 2020 के बधाई संदेश - फोटो : Pixabay
भौम के इस तरह के अनेकों मधुर वचनों से गणेश जी अति प्रसन्न हुए और पुनः बोले हैं पृथ्वी पुत्र तुम देवताओं के साथ सम्यकरूप से अमृतपान करोगे और मंगल इस नाम से लोक में तुम्हारी ख्याति होगी। अंगारक के सामान रक्तवर्ण होने के कारण तुम अंगारक नाम से भी प्रसिद्ध होगे। जो मनुष्य अंगारक चतुर्थी को तुम्हारा व्रत करेगा उसे वर्ष भर संकष्ट चतुर्थी व्रत करने से होने वाले फल के समतुल्य पुण्य प्राप्त होगा। उनके संपूर्ण कार्यों में निर्बिघ्नता होगी इसमें कोई संशय नहीं है। हे शत्रुओं को संतप्त करने वाले ! तुमने व्रतों में सर्वश्रेष्ठ चतुर्थी व्रत का अनुष्ठान किया अतः उसके प्रभाव से तुम अवंतीनगरी के राजा होगे। तुम्हारे नाम के संकीर्तन मात्र से मनुष्य अपनी सभी कामनाओं को प्राप्त करेगा।
 
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लाल बाग के राजा - फोटो : Twitter
मंगल को इस प्रकार वर देकर गजानन भगवान गणेश जी अंतर्ध्यान हो गए। उसके पश्चात मंगल ने भगवान गणेश की संपूर्ण सुंदर अंगों और दसभुजा वाली प्रतिमा की भक्ति पूर्वक स्थापना की और मंदिर का नाम मंगलमूर्ति रखा। तभी से अवंतिका क्षेत्र सभी मनुष्यों के लिए कामनाओं को पूर्ण करने वाला हो गया। अंगारकी चतुर्थी को मंगल की पूजा आराधना से जन्म कुंडली में मंगल ग्रह जनित दोषों से मुक्ति मिलती है।
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