एक पिता बेटे को अपने कलेजे के टुकड़े की तरह रखने का प्रयास करता है। उसकी छोटी-छोटी जरूरतों से लेकर उसके पसंद के सभी कामों को बड़े ही लगन और प्रेम भाव से करता है, ताकि बड़ा होकर वह बेटा उनका नाम रोशन करें। लेकिन सीधी जिले के ग्राम पडखुरी में एक पिता के अरमानों पर उस वक्त पानी फिर गया, जब उसका मासूम घर में ही फांसी के फंदे से लटकता मिला। पिता का सपना था कि वह अपने बेटे को बड़ा आदमी बनाएं। ताकि समाज में एक अच्छी शोहरत के साथ कामयाबी नसीब हो। मजदूरी का कार्य करने वाला पिता कड़ी मेहनत कर अपने बेटे को अच्छी जिंदगी का सपना देख रहा था, लेकिन वह सपना चूर-चूर हो गया। तीन बेटों में से सबसे छोटा बेटा जो कि घर में सबका लाड़ला था वह सब को छोड़कर अकेला चला गया।
पिता का सपना था कि उनका बड़ा बेटा आशीष प्रजापति जो कि भोपाल में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था, वह अपने काम में सफल हो और एक दिन बड़ा मुकाम हासिल करें। साथ ही उन्होंने अपने दूसरे बेटे को सीएम राइज स्कूल रामपुर नैकिन में दाखिला कराया था और उसे आईएएस बनाने का सपना देख रहे थे। तीसरा और सबसे छोटा बेटा अमित प्रजापति जो कि घर में सबसे छोटा था और उसने कड़ी मेहनत करके नवोदय विद्यालय की चयन परीक्षा में 98% अंक लाकर सबको हैरान कर दिया। पिता ने सपना देखा था कि वह पढ़ने में सबसे होशियार व सबसे तेज है इसलिए उसे हम आईपीएस बनाएंगे। जिसकी तैयारी भी वह बेटा अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए कर रहा था। लेकिन हाल ही में कुछ ऐसा हुआ कि बेटा डिप्रेशन में चला गया और डिप्रेशन का शिकार होकर उसने सुसाइड जैसा गंभीर कदम उठा लिया।
विज्ञापन
2 of 3
छात्र का घर, जहां उसने सुसाइड किया
- फोटो : अमर उजाला
अमित प्रजापति के पिता आल्हा प्रजापति पेशे से मजदूरी का कार्य करते हैं। वह दूसरे राज्य छत्तीसगढ़ में जाकर ईंट बनाने का काम करते हैं और किसी तरह घर का गुजारा चलाते हैं। उनके हौसले इतने बुलंद थे कि वह खुद तो मजदूरी करते थे, लेकिन अपने बेटों को एक आईएएस और आईपीएस बनाना चाहते थे।
पिता आल्हा प्रजापति ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि मुझे पता ही नहीं था, नहीं तो उस दिन में नहीं आता। शायद अगर मैं उस दिन नहीं आता तो मेरे बेटे के साथ ऐसी घटना नहीं होती। आल्हा प्रजापति छत्तीसगढ़ से एक तारीख की रात को ही अपने घर पहुंचे थे। रात में उन्होंने बेटे के साथ बैठकर खाना खाया और फिर सोने चले गए। लेकिन जब सुबह देखा तो उनका बेटा फांसी के फंदे पर लटकता हुआ दिखाई दिया। जिसकी वजह से उनका रो -रोकर बुरा हाल है। वह उस हादसे को भुला नहीं पा रहे हैं। उनका कहना था कि अगर मेरा बेटा ऐसा कुछ करने वाला था, तो इससे अच्छा था कि मैं वहीं रहता घर ना आता। काश मैं घर में ना होता तो शायद मेरा बेटा आज जिंदा होता। लेकिन मेरे बेटे ने मरने की एक रात पहले ही मुझसे बताया था कि मुझे नवोदय विद्यालय में एक टीचर काफी परेशान करते हैं। गाली गलौज देते हैं साथ ही साथ हमसे अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और दूसरे बच्चों के सामने जलील भी करते हैं। हाल ही में कुछ दिन पहले मुझ पर चोरी का इल्जाम लगाया कि मैं जूता-चप्पल व मोजा चुराता हूं, जिसकी वजह से उन्होंने मुझे 22 तारीख की रात को ही मुझे घर पहुंचा दिया। अजीत पांडे ने कहा कि अब तुम यहां नहीं आना तुम यहां पढ़ने के योग्य नहीं हो। यह सब बातें मुझे उसने खाना खाने के दौरान बताई लेकिन मैंने उसे समझाया और कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा। सब ठीक हो जाएगा मैं आपके टीचर से बात करूंगा। लेकिन टीचर से बात करने के पहले ही वह अगले दिन फांसी के फंदे में झूल गया।
बच्चे को बीमार कह कर छोड़ दिया था घर
अमित प्रजापति की मां ने रोते हुएबताया है कि हमें कुछ भी ऐसा पता नहीं था कि हमारा बेटा बीमार है। मुझे टीचर ने बताया कि आपका बेटा बीमार है, इसलिए हम आपके बेटे को छोड़ रहे हैं और ना जाने किस जगह पर मेरी सिग्नेचर करा लिए हैं। साथ ही साथ मेरी फोटो भी ली है। इसके बाद कुछ दिन तक मेरा बेटा गुमसुम रहता था। एक तारीख की रात में हम लोगों ने साथ में खाना खाया उसके बाद मैं अपना काम करके सोने चली गई। सुबह उठे तो मेरा बेटा वहां पर नहीं था कई बार दरवाजा खोलना चाहा, लेकिन उसने नहीं खोला। मैंने अमित के पिता को कहा कि बेटा दरवाजा नहीं खोल रहा है इसलिए वह खिड़की तोड़कर अंदर घुसे, देखा तो उनका बेटा अंदर फांसी के फंदे पर लटक रहा था।
मामले की जांच करने पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
भाई को बताई थी हकीकत
वहीं, अमित प्रजापति के भाई अजीत प्रजापति का अपने भाई से कुछ ज्यादा ही लगाव था। दोनों साथ में ही रहते थे। दोनों एक दूसरे से सारी बातें शेयर भी किया करते थे। अजीत प्रजापति ने बताया कि कुछ दिनों से उसे परेशानी हो रही थी। उसके शिक्षक अजीत पांडे परेशान किया करते थे। जबरन चोरी का इल्जाम लगा देते थे, जब भी होता उसे क्लास में अकेला कर देते थे। सोने के लिए सभी बच्चों को दूसरे कमरे में शिफ्ट कर देते थे और वह अकेला रहा करता था। जिससे वह परेशान था और परेशानी की वजह से उसका दिमागी संतुलन बिगड़ रहा था। साथ ही उसे 22 तारीख को शिक्षक ने घर पहुंचा दिया गया, जहां वह घर में गुमसुम रहता था।
उस दिन मैं और मेरे भाई पढ़ाई कर रहे थे। मेरा पेपर चल रहा था इसलिए मैं देर रात तक पढ़ा लेकिन मैं उस दिन उसके साथ नहीं बल्कि अकेले पड़ रहा था। जैसे ही मैं सोया और सुबह उठा पर मेरे कमरे में चाय नहीं आई, क्योंकि वह जब भी घर रहता था। तो सुबह की चाय वह मुझे बनाकर पिलाता था। तब जाकर मैंने देखा तो वह अपने बिस्तर पर नहीं था वह दूसरे कमरे में एंगल में तार को रस्सी नुमा बनाकर उसी में लटक रहा था। मैं बचाना तो चाह रहा था, लेकिन वह इस दुनिया में नहीं था। बस मैं इतना चाहता हूं कि यह सब हो गया है लेकिन अब ऐसा काम करवाने को मजबूर करने वाले उस शिक्षक को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।