यदि नवम भाव का स्वामी गुरु तथा दशम भाव का स्वामी मंगल का परस्पर संबंध हो तो उत्तम राज योग को देने वाला होता है। जातक मान, सम्मान, प्रतिष्ठा एवं सत्ता का भोग करता है। सप्तम भाव, अष्टम भाव, तृतीय भाव, एकादश भाव के स्वामी शनि बुध, शुक्र अरिष्टयोग पैदा करते हैं। लग्न का स्वामी चंद्रमा सदैव शुभकारी माना गया है।