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कर्क राशि के जातकों का इस उम्र के बीच होता है भाग्योदय, ये पांच साल देते हैं शारीरिक कष्ट

Sat, 18 Jan 2020 12:40 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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कर्क लग्न नौ नक्षत्र चरणों से बनता है। इन नौ चरणों में पुनर्वसु नक्षत्र का एक चरण और पुष्य व आश्लेषा नक्षत्र के चार-चार चरण शामिल हैं। प्राय: देखा गया है कि कर्क लग्न का जातक मध्यम कद का होता है। आसपास के लोगों से जल्द घुल-मिल जाना और भ्रमणशील रहना, उसके स्वभाव की विशेषता होती है। ऐसा जातक घर से दूर रहकर भी यशस्वी जीवन जीता है। कर्क लग्न के जातक का पंचम भाव एवं दशम भाव का स्वामी मंगल ग्रह होता है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. मस्तराम शर्मा ने बताया यह जातक को अपनी महादशा, अंतर्दशा एवं प्रत्यंतर दशा में सर्वोत्तम फल देता है और संतान सुख, राज सुख व प्रोन्नति आदि का योग बनाता है । यदि मंगल ग्रह पंचम भाव अथवा दशम भाव में हो तो विशेष राज योगकारक माना गया है। इसी प्रकार गुरु ग्रह नवम भाव का स्वामी होने के कारण यहां लग्न में उच्च तथा नवम भाव में स्वगृही होने के कारण सुख देने वाला होता है।
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यदि नवम भाव का स्वामी गुरु तथा दशम भाव का स्वामी मंगल का परस्पर संबंध हो तो उत्तम राज योग को देने वाला होता है। जातक मान, सम्मान, प्रतिष्ठा एवं सत्ता का भोग करता है। सप्तम भाव, अष्टम भाव, तृतीय भाव, एकादश भाव के स्वामी शनि बुध, शुक्र अरिष्टयोग पैदा करते हैं। लग्न का स्वामी चंद्रमा सदैव शुभकारी माना गया है।

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चंद्रमा और गुरु का संबंध भाग्योदय व धार्मिक कार्यों में विशेष रुचि प्रदान करने वाला होता है। कर्क लग्न वाले जातक के लिए 5वां, 25वां, 40वां, 58वां और 60वां वर्ष शारीरिक कष्ट कारक बताए गए हैं। इन वर्षों में तुला दान व छाया दान कराने के साथ मृत संजीवनी मंत्र का जाप हितकारी माना गया है। जबकि, 24, 25, 26 व 28 से 32 वर्ष अच्छे भाग्य में सहायक होते हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार यदि चंद्रमा कर्क राशि का 3 अंश 20 कला पर हो तो जन्म लेने वाला जातक प्राकृतिक स्वभाव का होता है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. मस्तराम शर्मा - फोटो : अमर उजाला
ऐसे जातक को पाचन तंत्र पर विशेष ध्यान देते हुए औषधि का सेवन सोच समझ कर करना चाहिए। जातक के लिए सात्विक भोजन सदैव सुख कारक होता है। कर्क लग्न वाला जातक करिअर में व्यावसायिक गतिविधियों, नेवी, दूध और उससे बनने वाले उत्पाद के कारोबार, होटल व्यवसाय, विदेश में सेवा समेत पुलिस और मिलिट्री व अर्द्धसैनिक बलों में काम करने वाला होता है।
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