हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में बीमार होने पर मरीजों का जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ना आम बात हो गई है।
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- फोटो : अमर उजाला
ताजा मामले में लाहौल के जिला मुख्यालय केलांग में तैनात पुलिस कर्मी धनीराम (32) को करीब 44 युवाओं ने स्ट्रेचर की मदद से चार फीट बर्फ में सिस्सू से रोहतांग टनल के नॉर्थ पोर्टल तक पहुंचाया।
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मरीज को यहां तक तक लाने में करीब पांच घंटे का समय लगा। धनीराम पांच दिन से बीमार थे। घाटी से बाहर निकाला जाना था, लेकिन खराब मौसम के चलते पुलिस कर्मी को लेने आया चॉपर रोहतांग दर्रा नहीं लांघ सका।
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मरीज को सिस्सू में ही ठहराया गया। शुक्रवार को मौसम खराब रहने पर सिस्सू, शाशिन, गोंपाथांग, तोचे और तेलिग गांव के युवाओं के साथ शिक्षा विभाग और लोक निर्माण विभाग के युवाओं ने उन्हें घाटी से निकाला।
इससे पहले इसी महीने लाहौल घाटी की दारचा पंचायत के छिका रारिक गांव की एक महिला मरीज रिंचिन डोलमा (65) को भी ढाई फीट बर्फ में नौ किलोमीटर उठाकर एक एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ा था।