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World Tourism Day: जानिए हिमाचल के इन 10 खूबसूरत पर्यटन स्थलों को, जहां घूमकर नहीं भरेगा आपका मन

Mon, 27 Sep 2021 01:48 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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हिमाचल के पर्यटन स्थल - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश में हर साल लाखों देसी-विदेशी सैलानी यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को निहारने के लिए पहुंचते हैं। शुद्ध आबोहवा और प्राकृतिक नजारों से भरपूर हिमाचल की वादियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। प्रदेश में घूमने के लिए कई बेहतरीन स्थान हैं। साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए भी यहां अच्छे स्थल है। यहां पर रिवर राफ्टिंग, ट्रैकिंग, वॉटर स्पोर्ट्स और पैराग्लाइडिंग आदि का आनंद ले सकते हैं।

हिमाचल को देवभूमि भी कहा जाता है, यहां धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से कई दर्शनीय स्थल हैं। साथ ही कई ऐतिहासिक धरोहर भी हैं। सालाना करीब पांच लाख विदेशी सैलानी हिमाचल पहुंचते हैं जिनमें से अधिकतर शिमला का रुख करते हैं। विदेशी सैलानी हैरिटेज टूरिज्म के लिए शिमला, एडवेंचर टूरिज्म के लिए मनाली और आध्यात्मिक टूरिज्म के लिए धर्मशाला का रुख करते हैं। किन्नौर और लाहौल-स्पीति भी विदेशी सैलानियों की पसंदीदा सैरगाह है।  जानिए हिमाचल के 10 प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में...
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शिमला - फोटो : अमर उजाला
ब्रिटिशकाल में देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही हिल्सक्वीन के नाम से मशहूर शिमला की खूबसूरत वादियां देसी के साथ विदेशी पर्यटकों की भी प्रमुख सैरगाह है। शिमला में ऐतिहासिक मालरोड, रिज, क्राइस्ट चर्च, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान(एडवांस्ड स्टडी), गेयटी थियेटर, राज्य संग्रहालय के अलावा कई ऐतिहासिक इमारतें व दर्शनीय स्थल हैं। वहीं, प्रसिद्ध जाखू हनुमान मंदिर, तारादेवी मंदिर, संकटमोचन मंदिर के अलावा कालीबाड़ी मंदिर शिमला के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। जाखू मंदिर के लिए रोपवे या सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।
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कुफरी(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
वहीं शिमला से करीब 15 किलोमीटर दूर कुफरी पर्यटकों की पसंदीदा सैरगाहों में से एक है। प्राकृतिक नजारों से भरपूर कुफरी में घुड़सवारी, रोप क्लाइबिंग, जिप लाइन का लुत्फ उठाने के अलावा सेब के बगीचे भी निहार सकते हैं। इसके अलावा कुफरी चिड़ियाघर  में कई तरह के वन्य जीव आकर्षण का केंद्र रहते हैं। सोलन जिले के चायल, बड़ोग और कसौली में घूम सकते हैं। चंड़ीगढ़ से सीधी बस सेवा या कालका से रेल के जरिये शिमला पहुंचा जा सकता है। वहीं, दिल्ली से एचआरटीसी व पर्यटन निगम की सीधी बस सेवा की भी सुविधा है। इसके अलावा जुब्बड़हट्टी तक हवाई मार्ग से भी सफर किया जा सकता है। फिलहाल हवाई सेवा बंद है।

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कालका-शिमला टॉय ट्रेन - फोटो : अमर उजाला
विश्व धरोहर में शामिल 118 साल पुराना ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग भी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है। पारदर्शी विस्ताडोम कोच में सफर कर वादियों को भी निहार सकते हैं।  9 नवंबर, 1903 को कालका-शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी। अपने 118 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए है।  देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेलमार्ग कालका स्टेशन 656 (मीटर) से शिमला (2,076) मीटर तक जाता है। 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।
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कालका-शिमला रेल
103 सुरंगें आकर्षण का केंद्र
कालका-शिमला रेललाइन पर 103 सुरंगें सफर को रोमांचक बनाती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है। इसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन ढाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया था। कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते यह पुल 64.76 किमी पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं। 
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शिमला रेलवे स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला
कालका-शिमला रेललाइन बॉलीवुड के लिए आकर्षण का केंद्र रही है। 1974 में सुपरहिट फिल्म दोस्त का गाना गाड़ी बुला रही है इसी मार्ग पर फिल्माया गया था। 1960 में शम्मी कपूर की फिल्म ब्वाय फ्रेंड का गाना मुझको अपना बना लो... कालका-शिमला रेलमार्ग पर शूट हुआ था। साल 2000 में प्रीति जिंटा की फिल्म क्या कहना के साथ ऑल इज वेल, जब वी मेट, सनम रे और रमैया वस्तावेया जैसी फिल्मों की शूटिंग इस ट्रैक पर हो चुकी है।
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मनाली - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में घूमने के लिए कई मनोरम स्थल है। मनाली, रोहतांग पास, सोलंगनाला, रोहतांग टनल, वशिष्ठ, हिडिंबा मंदिर, मनाली गांव, नग्गर, जलोड़ी दर्रा, पार्वती घाटी, मणिकर्ण, तीर्थन, बंजार और जिभी आदि स्थल पर्यटकों से भरे रहते हैं। देवदार से घने जंगल व बर्फ से लकदक वादियां सैलानियों को यहां आने पर मजबूर करती हैं। यहां  पैराग्लाइडिंग, रिवर राफ्टिंग आदि का भी आनंद उठा सकते हैं। कसोल को मिनी इजराइल भी कहा जाता है।  

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अटल टनल रोहतांग। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, 10040 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व में सबसे लंबी अटल टनल रोहतांग पर्यटकों की पसंदीदा सैरगाहों में शामिल है।  9.02 किलोमीटर लंबी अटल टनल रोहतांग किसी अजूबे से कम नहीं है। यह टनल अपनी विशेषताओं के लिए खास है। टनल में हर 500 मीटर पर आपातकाल सुरंग है, जो टनल के दोनों छोरों पर निकलती है। हर 150 मीटर पर आपातकाल 4जी फोन की सुविधा है। हर 60 मीटर पर सीसीटीवी हैं। अटल टनल रोहतांग के दोनों छोरों पर पूरी टनल का कंट्रोल रूम है। यहां से हर किसी पर पैनी नजर रखी जाती है। अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के सिस्सू तक कई दर्शनीय स्थल मौजूद हैं। बर्फ से लदी खूबसूरत वादियां सभी को आकर्षित करती हैं। कुल्लू- मनाली के लिए सड़क या हवाई मार्ग से पहुंचा जा सकता है। 

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खज्जियार
चंबा जिले के डलहौजी और खज्जियार में भी बड़ी संख्या में हर साल सैलानी पहुंचते हैं। खज्जियार  को 'मिनी स्विटजरलैंड' खजियार झील हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में 1,920 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसके चारों ओर देवदार के पेड़ और झील का नीला पानी का नजारा जबरदस्त होता है। यहां की सबसे आकर्षक चीज तैरता हुआ टापू है जो असल में झील की सतह पर उगने वाले घासों का गुच्छा है। खजियार की खूबसूरती को देखकर 'मिनी स्विट्जरलैंड' की उपाधि दी गई।

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बिलिंग घाटी पैराग्लाइडिंग साइट - फोटो : अमर उजाला
वहीं, कांगड़ा घाटी में घूमने के लिए बेहतरीन स्थल हैं। महाराणा प्रताप सागर झील घूम सकते हैं। यह झील व्यास नदी पर बने बांध की वजह से बनी है। इस झील का पानी 180 से 400 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां पर करीब 220 पक्षियों की प्रजातियां हैं। यहां पर एक करेरी नामक झील भी है जो हरे-भरे जंगलों से घिरी हुई है।  कांगड़ा में धर्मशाला, मैक्लोडगंज, त्रियुंड, धर्मकोट, भागसूनाग औरनड्डी आदि जगह पर्यटन के लिए बहुत बेहतरीन हैं।  ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें तो यहां पर नूरपुर का किला, बैजनाथ शिव मंदिर है। यहां का मसरूर मंदिर, मैक्लोडगंज की चर्च भी एतिहासिक घरोहर हैं। कांगड़ा के बैजनाथ की बीड़ बिलिंग घाटी में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी पैराग्लाइडिंग साइट है। यहां पर आप पैराग्लाइडिंग का लुफ्त उठा सकते हैं।


 
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला। - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा भी यहां पर ट्रैकिंग करने की भी कई अच्छी जगह हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, भागसूनाग वॉटर फॉल आदि जगहों पर भी घूम सकते हैं। सड़क मार्ग से कांगड़ा जाने के लिए दिल्ली, पठानकोट औरचंडीगढ़ से सीधी बस सेवा उपलब्ध है। अगर हवाई मार्ग से जाना चाहते हैं तो कांगड़ा तो गग्गल एयरपोर्ट तक जा सकते हैं। यहां मां ब्रजश्वेरी देवी का मंदिर है। ये मंदिर अति प्राचीन है। इसके अलावा यहां पर कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिसमें मां चामुंडा देवी, मां ज्वालाजी मंदिर भी अति प्रसिद्ध हैं। यहां पर आप महाकाल मंदिर, नूरपुर में भगवान श्री कृष्ण और मीरा का मंदिर, आशापुरी मंदिर और मां बगलामुखी का मंदिर आद जगहों पर भी घूम सकते हैं।
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