मां ज्वाला के दरबार में जो भी भक्त नारियल चढ़ाता है उसकी सारी मुरादें पूरी हो जाती है। नारियल ही ऐसी चीज है जो मां के ज्यादातर मंदिरों में चढ़ाने के लिए पवित्र मानी जाती है। इसकी कहानी भी बेहद ही रोचक है।
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जानिए मां के दरबार में आखिर क्यों चढ़ाया जाता है नारियल
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यह कहानी जुड़ी है मां ज्वाला यानि माता पार्वती से। कहते हैं कि ध्यानु भक्त मां सती का रूप माने जाने वाली मां ज्वालाजी का परम भक्त था। वह चारों दिशाओं में मां के इस रूप का गुणगान कर रहा था।
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अकबर के शासनकाल के दौरान वह भक्तों की एक टोली के साथ दिल्ली से मां ज्वाला के दर्शन के लिए हिमाचल के कांगड़ा स्थित मां ज्वाला के दरबार आ रहा था। इसी दौरान अकबर ने उसकी परीक्षा ले ली।
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मुगल सम्राट अकबर के पूछने पर ध्यानु भक्त ने कहा कि मां ही इस दुनिया में सबसे शक्तिशाली है और सबकी मुरादें पूरी करती है। अकबर ने ध्यानु के घोड़े का सिर काट दिया और कहा कि यदि तुम्हारी मां ज्वाला में इतनी ही शक्ति है तो इसका सिर दोबारा जोड़ कर लाओ।
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ध्यानु काफी लज्जित हुआ और मां के दरबार में पहुंचकर दिन रात तपस्या करने लगा। मगर मां ने दर्शन नहीं दिए। आखिरकार ध्यानु ने मां को प्रसन्न करने के लिए अपना सिर काटकर मां को अर्पित कर दिया।
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तभी उसे मां ज्वाला शेर पर सवार होकर दिखाई दी। मां के विशाल रूप को देखकर वह विनती करने लगा। मां ने भी अपने भक्त की मुराद पूरी की और दोनों के सिर वापस जोड़ दिए। मगर मां ध्यानु के सिर काटने को लेकर काफी दुखी हो गई थी।
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इसके बाद मां ने ध्यानु से कहा कि भविष्य में कोई ऐसा न करे, इसके लिए एक उपाय बताती हूं। जो भी भक्त मुझे शुद्घ नारियल अर्पित करेगा, उसकी सारी मनोकामनाएं अपने आप पूरी हो जाएंगी।
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इसी के बाद से मां के दरबार में नारियल चढ़ाया जाने लगा। हालांकि अब कई मंदिरों में नारियल चढ़ाने पर पाबंदी है लेकिन अभी भी हिमाचल के कई मंदिरों में इसकी परंपरा जारी है।