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हिमाचल: इन 17 शिक्षकों ने कोरोना संकट में भी जगाए रखी शिक्षा की अलख, बने मिसाल

Thu, 02 Sep 2021 11:30 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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teacher award himachal - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संकट में भी शिक्षा की अलख जगाए रखने वाले शिक्षकों को शिक्षक दिवस के अवसर पर पांच सितंबर को सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले 17 शिक्षकों का सरकार ने राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन किया है। कुछ शिक्षकों ने कोरोना संकट में विद्यार्थियों की पढ़ाई को सुचारु चलाए रखने के लिए किताबों को घरों तक पहुंचाया। कुछ ने गूगल मीट और जूम एप से ऑनलाइन पढ़ाई करवाई। कुछ शिक्षकों ने स्कूलों में आकर स्मार्ट क्लासरूम से पढ़ाई को जारी रखा।

एक शिक्षक ने कोरोना संकट के बावजूद नेशनल खेलों के लिए खिलाड़ी तैयार किए। 17 शिक्षकों की इन्हीं खूबियों ने उन्हें आज राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार तक पहुंचाया है। यह शिक्षक सभी के लिए आज मिसाल बने हैं। इन शिक्षकों को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में सम्मानित करेंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर समारोह की अध्यक्षता करेंगे। शिमला, सोलन और मंडी जिला से तीन-तीन शिक्षकों का चयन हुआ है। चंबा जिले से किसी भी शिक्षक का नाम शामिल नहीं है। अन्य आठ जिलों से एक-एक शिक्षक को पुरस्कार मिलेगा। 
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शिक्षिका छिमे अंगमो - फोटो : अमर उजाला
स्कूल में नौ से 58 पहुंचाई बच्चों की संख्या
प्राइमरी स्कूल केलांग में तैनात छिमे अंगमो का नाम राज्य स्तरीय शिक्षक अवार्ड के लिए चयनित हुआ है। पांच सितंबर को शिमला में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर उन्हें सम्मानित करेंगे। छिमे अंगमो ने जनवरी 2017 में ज्वाइनिंग दी थी तो स्कूल में महज नौ बच्चे थे। उसी साल अप्रैल माह में यह संख्या 12 पहुंची। अब उनकी पाठशाला में प्री प्राइमरी से पांचवीं तक बच्चों की संख्या 58 हो गई है। कई प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों ने छिमे अंगमो के स्कूल में दाखिला लिया है। खंड शिक्षा अधिकारी किशन कुमार ने कहा कि छिमे अंगमो का कार्य सराहनीय है। 
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सुभाष चंद (कला अध्यापक, बसाल) - फोटो : अमर उजाला
कुछ हटकर करवाया, बच्चों ने खेल में भी नाम कमाया
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाल (ऊना) के कला अध्यापक सुभाष चंद की परीक्षा का परिणाम हमेशा सर्वश्रेष्ठ रहा है। उन्होंने वॉलीबाल खिलाड़ी भी तैयार किए, जो राज्य स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हैं। करीब एक दशक से वह मिड-डे मील का कार्य सुचारु रूप से चला रहे हैं। विद्यालय परिसर को भी उन्होंने विभिन्न माध्यमों से संवारा है। सुभाष चंद ने कहा कि उनका प्रयास रहता है कि वह विद्यार्थियों के लिए हटकर करें और उन्हें पढ़ाई भी रोचकता के साथ करवाएं। 

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संजीव शर्मा, बलग का घाट, बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में पढ़ाई के साथ बच्चों को योग भी करवाया
 प्राथमिक पाठशाला बलग का घाट के अध्यापक संजीव शर्मा ने कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं लगातार लगाईं। साथ ही बच्चों की शारीरिक गतिविधियों का भी ख्याल रखा। इसके लिए ऑनलाइन योग की कक्षाएं लगवाईं। कोरोना काल में भी इनके स्कूल में बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ। स्कूल में पहली से पांचवीं तक 57 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल में बच्चे प्रोजेक्टर, ग्रीन बोर्ड, व्हाइट बोर्ड और स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ाई करते हैं। इनका स्कूल बड़ी सुविधाओं वाले निजी स्कूल से कम नहीं है। 
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विवेक कौशिक, गलानाघाट, सिरमौर - फोटो : अमर उजाला
स्मार्ट क्लास रूम बनाए, बच्चों को दिए जूते-स्वेटर
 पच्छाद के गलानाघाट स्कूल में कॉमर्स प्रवक्ता विवेक कौशिक जिस भी स्कूल में गए, वहां स्मार्ट क्लास रूम बनाए। चप्पल में आने वाले बच्चों के लिए डोनेशन से जूते खरीदे। सर्दियों के मौसम में बच्चों को स्वेटर भी किए। राज्य, जिला स्तर पर होने वाली कार्यशालाओं में शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी। जेबीटी पद पर रहते मोगीनंद, भूड़ और निहोग प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं शुरू करवाईं। प्राथमिक स्कूलों में वार्षिक समारोह आयोजित कराने का श्रेय भी विवेक को मिला। जिस स्कूल में भी सेवाएं दीं, वहां वार्षिक परिणाम 85 फीसदी से अधिक रहा। 
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सुरेश कुमार, बीड बगेहड़ा, हमीरपुर - फोटो : अमर उजाला
बीड बगेहड़ा स्कूल में अंग्रेजी माध्यम में शुरू करवाई पढ़ाई
 राजकीय केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला बीड बगेहड़ा के केंद्र मुख्य शिक्षक सुरेश कुमार ने बीड बगेहड़ा स्कूल में ज्वाइन करने के बाद इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई शुरू करवाई। स्कूल में दाखिले के लिए पंफ्लेट प्रिंट करवाए। वर्तमान में स्कूल में 105 विद्यार्थियों का दाखिला करवाया गया। स्कूल को स्वर्ण जयंती ज्ञानोदय क्लस्टर श्रेष्ठ विद्यालय योजना में स्कूल को शामिल करवाया। योजना के तहत स्कूल को सरकार से 15 लाख का बजट मिला। दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से शौचालय बनवाए। 
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पंकज शर्मा, अढाल स्कूल - फोटो : अमर उजाला
चिल्ड्रन साइंस क्विज के लिए तैयार बच्चों ने चमकाया नाम
अड़ाल स्कूल में तैनात रहे शिक्षक पंकज शर्मा वर्तमान में शिमला में शिक्षा उप निदेशक के पद पर प्रतिनियुक्ति के तौर पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि 11 गतिविधियों के लिए उनके छात्रों को को प्रदेश अवार्ड मिल चुका है। चिड्रन साइंस क्विज प्रतियोगिता में भी उनकी ओर से तैयार किए गए छात्रों को प्रदेश स्तर पर अवार्ड मिला है। उन्होंने दूरदराज क्षेत्र डोडरा क्वार तक स्काउट एंड गाइड और पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों को चलाया है। पंकज शर्मा मूल रूप से अढाल पंचायत के ही बटाडी गांव के रहने वाले हैं।

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प्रेमपाल दुल्टा, रामपुर शिमला - फोटो : अमर उजाला
दुर्गम क्षेत्रों में जगाई शिक्षा की लौ, 20 बार किया रक्तदान
 बीते 21 वर्षों से छात्रों का भविष्य संवार रहे प्रवक्ता प्रेमपाल दुल्टा वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रामपुर में सेवाएं दे रहे हैं। वह शिमला और कुल्लू जिले में सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ अपना सामाजिक दायित्व भलीभांति निभाया है। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मेलनों में भाग लिया है। आर्थिक एवं अन्य समस्याओं से जूझ रहे छात्रों की मदद में भी दुल्टा का योगदान सराहनीय रहा है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना इनकी एक विशेष पहचान रही है। दुल्टा ने 20 बार रक्तदान कर मरीजों की मदद की है। 

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हरदेव, चामत भड़ेच, सोलन - फोटो : अमर उजाला
बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी किया तैयार
 सोलन के चामत भड़ेच स्कूल के अध्यापक हरदेव शर्मा ने कई बेहतर कार्य कर स्कूलों को सम्मान दिलाया है। वह इससे पहले किनौर के कल्पा में सेवाएं दे चुके हैं। अभिभावकों के साथ समन्वय बनाकर सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाई। हर स्कूल में सेवाएं देने के दौरान हिंदी और संस्कृत में सौ फीसदी परिणाम रहा है। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार कर रहे हैं। अभी तक नौ विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल रहे हैं। स्वच्छता अभियान में कल्पा स्कूल को जिले में पहला स्थान दिलाया। चामत भड़ेच स्कूल के ब्लॉक में पहला स्थान पाया है। 

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सुमित सिंह, बघेरी, सोलन - फोटो : अमर उजाला
सुमित के तैयार किए आठ खिलाड़ी खेले नेशनल
 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बघेरी के शारीरिक प्रवक्ता सुमित सिंह की ओर से तैयार किए गए आठ खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। उनके समाचार पत्रों में शिक्षा, प्रदूषण और खेल को लेकर कई लेख प्रकाशित हो चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स में रेफरी की भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने एक किताब भी लिखी है। कोरोना काल में ऑनलाइन प्रतियोगिता में उनके स्कूल की छात्रा ने राज्य स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया। कोरोना काल में राज्य की सीमाओं पर ड्यूटी देने पर उन्हें उपायुक्त ने सम्मानित भी किया था। सुमित स्वयं भी राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं। लंबी कूद में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया। 

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सुरेंद्र मेहता, बरोटीवाला, सोलन - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल को दिए आठ हैंडबाल खिलाड़ी 
 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बरोटीवाला के शारीरिक अध्यापक सुरेंद्र पाल मेहता ने हैंडबाल में काफी खिलाड़ी तैयार किए। इसमें अभी तक 50 से अधिक खिलाड़ी हिमाचल को दिए हैं। इन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया है। हैंडबाल में उनकी प्रशिक्षित छात्रा ने पहले अंडर-14 और बाद में ओपन वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया। सुरेंद्र मेहता के शारीरिक अध्यापक रहते स्कूल में आठ ट्रॉफियां जीती हैं। उनके तैयार किए डेढ़ सौ से अधिक खिलाड़ी राज्य स्तर तक खेल चुके हैं। 

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प्रवक्ता धर्मचंद, नग्गर कुल्लू - फोटो : अमर उजाला
19 साल की नौकरी में रोपे 10 हजार पौधे
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नग्गर में तैनात प्रवक्ता धर्मचंद ने 19 साल की नौकरी के दौरान एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी के रूप में स्वयंसेवियों के साथ दस हजार पौधे रोपे। स्वच्छता अभियान में भी बेहतरीन कार्य किया। मतदाता जागरूकता अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कोरोना महामारी के दौरान मनाली विधानसभा क्षेत्र की 20 पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया। 22 राज्य स्तरीय शिविरों में हजारों एनएसएस छत्रों को प्रशिक्षण दिया। 2015-16 में राष्ट्रीय एनएसएस शिविर में हिमाचल, पंजाब और चंडीगढ़ के प्रभारी के रूप में भाग लिया। धर्मचंद की अगुवाई में कुल्लू जिले के एनएसएस के दो छात्रों ने गणतंत्र दिवस की परेड में भाग लिया।

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जिया लाल, किन्नौर रिकांगपिओ - फोटो : अमर उजाला
किन्नौर के जिया लाल 5 सितंबर को शिमला में होंगे सम्मानित
वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिकांगपिओ में प्रधानाचार्य जिया लाल नेगी को भी राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। जिले के आकपा के मूल निवासी जिया लाल ने कानम स्कूल से शिक्षा का सफर तय किया था। विभिन्न जिलों में सेवाएं देने के बाद वह वर्तमान में वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिकांगपिओ में बतौर प्रधानाचार्य अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश सरकार ने 14 शिक्षकों का चयन किए उनके आवेदनों में से किया है। इसके लिए चयन कमेटी का गठन किया गया था। तीन शिक्षकों का चयन सरकार ने किया है। 

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अजय कुमार, संजौली, शिमला - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में घर जाकर बच्चों को दी पढ़ने की सामग्री
 जिला शिमला के कोटखाई स्कूल के प्रधानाचार्य और पूर्व में संजौली कॉलेज में भूगोल प्रवक्ता रहे अजय कुमार वशिष्ठ ने कहा कि वह हमेशा अपने शिक्षण कार्य को बेहतर ढंग से करने और उसमें गुणात्मक सुधार लाने के लिए प्रयासरत रहे हैं। कोरोना काल में छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाने के साथ जरूरतमंद बच्चों को उनके घर जाकर नोट्स और करीब डेढ़ लाख की पढ़ने की सामग्री वितरित की। कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया। एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी रहते महिला सशक्तीकरण, मतदान की उपयोगिता पर जागरूक भी किया। उन्हें एशिया प्राइड अवार्ड, हिमाचल सेवारत्न जैसे अवार्ड से नवाजा जा चुका है। 

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टीजीटी मेडिकल शिक्षिका कुंजन वर्मा - फोटो : अमर उजाला
घर-घर पहुंचाई शिक्षण सामग्री
सराज विस क्षेत्र के ड़डोह स्कूल की टीजीटी मेडिकल शिक्षिका कुंजन वर्मा ने स्कूलों में उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं। कोरोना काल में बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्होंने घर-घर सामग्री पहुंचाई। पहले डडोह स्कूल प्राइमरी तक होता था। कॉलेज से पासआउट होने के बाद उन्होंने स्कूल में प्राइवेट कक्षाएं बिठाकर जनसेवा की। बाद में सरकार ने स्कूल को अपग्रेड किया। इसमें कुंजन का योगदान रहा।

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इंद्रेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
करसोग की प्राथमिक पाठशाला खडूना में तैनात इंद्रेश कुमार ने विद्यालय के विकास और विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा देने में सराहनीय योगदान दिया है। वे अपने अधीनस्थ राजकीय केंद्र प्राथमिक पाठशाला भनेरा में अध्यापक की कमी के चलते वहां की चौथी और पांचवीं के विद्यार्थियों को भी ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। वे पढ़ना-लिखना अभियान के तहत 15 से 85 वर्ष के निरक्षर लोगों को भी अक्षर ज्ञान करा रहे हैं। वे कोरोना काल में एसडीएम कार्यालय करसोग में भी सेवाएं दे रहे हैं।

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इंद्र सिंह ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला थुनाग में कार्यरत इंद्र सिंह ठाकुर ने कोविड काल में स्कूल के बच्चों को गुणात्मक शिक्षा देने में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। उन्हें वर्ष 2004 में नेपगेल अवार्ड मिला था। इसके बाद 2013-14 में निर्मल भारत अभियान अवार्ड हासिल किया। यह सम्मान ब्लॉक स्तर पर प्रथम आने पर मिलता है। 
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जेबीटी राजेंद्र राणा - फोटो : अमर उजाला
वॉलीबाल के हैं बेहतरीन खिलाड़ी, निषाद के साथ नेशनल कैंप में लिया था हिस्सा
वहीं, राजकीय प्राथमिक पाठशाला टिहरी के जेबीटी राजेंद्र राणा ने बताया कि उनके स्कूल के बच्चे हमेशा खेलों में अव्वल रहे हैं। स्कूल की लड़कियां 2011 से 2018 तक लगातार वॉलीबाल चैंपियन रही हैं। कई विद्यार्थी स्टेट और नेशनल तक खेल चुके हैं। साल 2017 में पंचकूला में हुए नेशनल कैंप में उन्होंने हाल ही में टोक्यो पैरालंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाले निषाद के साथ हिस्सा लिया था। राजेंद्र खुद दिव्यांग होने के साथ वॉलीबाल के बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं। 2015 और 2016 में स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए घर-घर जागरूकता अभियान चलाया था। 2016 में स्कूल में पहली बार प्री नर्सरी कक्षा शुरू की गई। सरकार ने अभी दो साल पहले ही स्कूलों में इसे अनिवार्य किया है। इस समय प्री नर्सरी को डालकर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 150 है। कोरोना काल में जेबीटी अध्यापक राजेंद्र राणा ने ज्वालामुखी कोविड सेंटर में सेवाएं दी हैं। स्कूल में किचन गार्डन भी बनाया। 
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