अषाढ़ मास की अमावस्या तिथि पर कंकणाकृति का सूर्य ग्रहण सुबह से दोपहर तक देश-विदेश समेत पूरे हिमाचल में भी देखने को मिला। ग्रहण का अद्भुत और अभूतपूर्व नजारा हिमाचल की राजधानी शिमला समेत प्रदेश के अन्य भागों में देखा गया। ज्योतिष में रविवार के दिन मृगशिरा और आर्द्रा नक्षत्र एवं मिथुन राशि में पड़ने वाले सूर्य ग्रहण को चूड़ामणि सूर्य ग्रहण कहते हैं। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देखने के लिए लोगों में काफी उत्साह दिखा। लोगों ने सावधानी बरतते हुए एक्स रे फिल्म, टेलीस्कोप आदि से सूर्य ग्रहण देखा।
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- फोटो : अमर उजाला
आज साल का सबसे बड़ा दिन भी है। यह सदी का दूसरा ऐसा सूर्य ग्रहण है, जो 21 जून को हो रहा है। इससे पहले 2001 में 21 जून को सूर्य ग्रहण हुआ था। नेत्र रोग विशेषज्ञ के अनुसार ग्रहण के दौरान पराबैगनी किरणें निकलती हैं। इससे आंख की रोशनी जा सकती है। इसे नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। इससे आंख का पर्दा खराब हो सकता है।
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नाहन में प्रोफेसर हेमंत कुमार ने सूर्य ग्रहण की दुर्लभ तस्वीरों को अपने टेलीस्कोप के जरिये कैद किया। उन्होंने ग्रहण शुरू होने से लेकर परमग्रास और समाप्ति तक की शानदार तस्वीरें ली हैं। सिरमौर में सुबह 10:17 बजे से 01:38 बजे तक। जबकि चंबा में ग्रहण स्पर्श सुबह करीब 10 बजकर 9 मिनट से शुरू हुआ।
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वहीं कुल्लू जिले में लोगों ने शास्त्रों के अनुसार शंख बजाकर ग्रहण के प्रभाव को कम करने का प्रयास किया। मंडी और कुल्लू जिलों में सूर्यग्रहण स्पर्श सुबह करीब 10:24 बजे से 1:47 बजे तक जबकि ग्रहण का मध्य 12:03 बजे हुआ। ज्योतिषाचार्य मनोज शर्मा के अनुसार मंडी में 12:03 बजे 94.5 और कुल्लू में 93.9 फीसदी सूरज ढंक गया।
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ऊना में सूर्य ग्रहण सुबह करीब 10 बजकर 24 मिनट पर शुरू हुआ। बिलासपुर के पंडित जीवानंद शैल के अनुसार ग्रहण सुबह करीब 09:15 बजे प्रारंभ हुआ।
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हमीरपुर में ग्रहण करीब 10:17 बजे प्रारंभ हुआ और ग्रहण का मध्य 12:10 और ग्रहण का समाप्ति काल 01:38 बजे। सोलन में सुबह 10:23 बजे ग्रहण शुरू हुआ और दोपहर 1:48 बजे खत्म हुआ। कांगड़ा में करीब 10:17 बजे शुरू हुआ। धर्मशाला में लोगों ने एक्स रे फिल्म से सूर्य ग्रहण देखा।
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वैदिक ज्योतिष अनुसंधान संस्थान शिमला के ज्योतिषाचार्य, डॉ. मस्तराम शर्मा के अनुसार ग्रहण मिथुन और धनु राशि के जातकों के लिए ज्यादा प्रभावकारी है। इन राशि के जातकों के लिए दान करना शुभ होगा। पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। हरे वस्त्रों का दान करना और गाय को चारा देना भी शुभ होगा।
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शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान, दान, तप, पाठ करने का बहुत अधिक महत्व माना गया है। ग्रहण के दौरान या पहले भोजन बना हुआ है तो उसे फेंकना नहीं चाहिए। बल्कि उसमें तुलसी के पत्ते डालकर उसे शुद्ध कर लेना चाहिए।
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ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान-ध्यान कर घर में गंगाजल छिड़कना चाहिए और फिर जाकर भोजन ग्रहण करना चाहिए। ग्रहण के खत्म होने के बाद नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए। फिर पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करके भगवान का स्नान करा कर पूजा-पाठ करना चाहिए।
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राजधानी शिमला में भी लोग दुर्लभ खगोलीय घटना के गवाह बने। शहर के लोगों ने इस अद्भुत खागोलीय घटना को देखा। पंचमुखी हनुमान मंदिर केलटी शिमला के पुजारी पंडित संजय शास्त्री ने बताया कि राजधानी शिमला में ग्रहण सुबह 10:23 से दोपहर 1:48 बजे तक देखा गया। जबकि हिमाचल के अन्य जिलों में एक से दो मिनट के अंतराल पर नजर आया।
उधर सूर्य ग्रहण की समप्ति के बाद सिरमौर जिले में लोगों ने श्री रेणुका जी में पवित्र स्नान किया। साथ लगते क्षेत्र के लोगों ने ग्रहण के बाद झील में डुबकी लगाई। साथ ही पूजा.पाठ भी किया। स्नान के बाद ही भोजन ग्रहण किया।