विश्वविद्यालय में एसएफआई के 69 दिनों से चले आ रहे क्रमिक अनशन के बावजूद कुलपति और विवि प्रशासन की चुप्पी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूटा। एसएफआई ने आंदोलन को नजरअंदाज किए जाने के विरोध में परिसर में वीसी डॉ. एडीएन वाजपेयी शव यात्रा निकाली। शव यात्रा में भारी संख्या में छात्र शामिल हुए।
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एसएफआई
- फोटो : अमर उजाला
एसएफआई इकाई अध्यक्ष नोवल ने बताया कि जब व्यक्ति कुछ नहीं कहता, कुछ नहीं सुनता, और कुछ नहीं देखता, कुछ नहीं समझता वह व्यक्ति मर जाता है। इस शव यात्रा में शामिल कार्यकर्ताओं ने कुलपति विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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इस दौरान संगठन नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि कुलपति आम छात्रों की क्लास रूम, शिक्षक, छात्रावास जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने तक की मांग को नहीं सुन पा रहे हैं।
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69 दिनों से छात्र भूखे प्यासे बारी बारी से 48 घंटे के अनशन पर बैठे हैं, कुलपति रोज उन्हें देखते हुए अपने कार्यालय और घर जाते हैं। मगर वे इन समस्याओं का समाधान करने, बातचीत करने के बजाय इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर अपनी जिद्द पर अड़े हुए हैं।
छात्र भूखे प्यासे अनशन पर बैठ कर ही पीजी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं, जिससे जाहिर है कि छात्र अनशन पर मजबूरी में बैठे हैं। एसएफआई के मांगों को लेकर चल रहे 48 घंटे के क्रमिक अनशन पर मंगलवार को छात्र अयूब, विपिन और विपिन (एमसीए) विभाग ने मोर्चा संभाला।