तिलक राज की शहादत की सूचना के बाद में गमगीन पूरा परिवार रोता-बिलखता रहा। शहीद की पत्नी सावित्री देवी, मां विमला देवी और पिता लायक राम पूरा दिन बेसुध से रहे।
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पत्नी सावित्री देवी कमरे में सुध-बुध खोए बेड पर पड़ी थी। रिश्तेदार उसे संभाल रहे थे। शहीद तिलक राज केे 22 दिन के बेटे विवान को रिश्तेदारों ने बेड के पास झूले में सुलाया था।
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घर में जहां शहादत के गम का विलाप था, वहीं 22 दिन का मासूम मां के दूध के लिए रो रहा था। पति की शहादत के गम में डूबी मां मासूम के रोने से बेखबर थी। रिश्तेदार मां और मासूम को चुप कराने की कोशिश कर रहे थे।
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शहीद का बड़ा बेटा वरुण (3) मासूम आंखों से विलाप देख रहा था। अभी पापा बोलना सीख रहे वरुण को पता ही नहीं चल रहा था कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। वरुण को कभी उसके चाचा और कभी दादा अपनी गोद में उठाकर अपनी आंखों से बाहर आने को आतुर आंसुओं के सैलाब को रोकने की कोशिश कर रहे थे।
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तिलक राज ने मौत से 6 घंटे पहले वीरवार सुबह सवा 9 बजे अपनी पत्नी सावित्री देवी को फोन किया था। तिलक राज ने सावित्री से कहा था कि जम्मू से श्रीनगर के लिए उनकी कानवाई चल पड़ी है।
तिलक राज ने पत्नी से कहा था कि तुम दोनों बच्चों और माता पिता का ख्याल रखना। मैं श्रीनगर जा रहा हूं। फोन पर करीब 5 मिनट हुई बातचीत में तिलक राज ने अपने 22 दिन के छोटे बेटे विवान और बड़े बेटे वरुण का हालचाल पूछा था।