मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने राज्य सचिवालय के पास धरना दिया। सीटू के बैनर तले यूनियन ने ओल्ड बस स्टेंड शिमला के पंचायत घर से लेकर छोटा शिमला तक रैली निकाली। छोटा शिमला बस स्टाप के पास एकत्र होकर मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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मिड डे मील वर्कर्स
- फोटो : अमर उजाला
सीटू के राज्य अध्यक्ष जगतराम और महासचिव डा. कश्मीर सिंह ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कांग्रेस और भाजपा की सरकारों ने मिड डे मील वर्कर्स की मांगों की हमेशा अनदेखी की है। वर्कर्स को मात्र 33 रुपये दिहाड़ी और एक हजार रुपये मासिक दिया जा रहा है। इस महंगाई के दौर में मिड डे मील वर्कर्स के साथ भेदभाव हो रहा है।
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मिड डे मील वर्कर्स
- फोटो : अमर उजाला
इन्हें सिर्फ दस महीने का वेतन दिया जाता है। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष कांता महंत ने कहा सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है और बीस हजार से अधिक महिला कर्मियों को मात्र एक हजार रुपये देकर अपमानित कर रही है। प्रदर्शन के बाद यूनियन ने अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा को आठ सूत्रीय मांगपत्र भी सौंपा।
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मिड डे मील वर्कर्स
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मांगपत्र के माध्यम से मिड डे मील वर्कर्स को छह हजार रुपये मासिक वेतन देने, मेडिकल जांच का सारा खर्च शिक्षा विभाग को उठाने, 10 महीने की जगह 12 महीने का वेतन देने, वर्कर्स की छंटनी न करने, सभी स्कूलों में मिड डे मील वर्कर्स को रखने की मांग की।
इसके अलावा स्कूलों में मिलने वाले सभी छुट्टियां वेतन सहित देने और मिड डे मील वर्कर्स को नियमित करने के लिए नीति बनाने की मांग की गई। प्रदर्शन में सीटू नेता विजेंद्र मेहरा, मिड डे मील वर्कर शकुंतला, संतोष, महेंद्र, रतन, अंजना, विरमा डोलमा, खिमी देवी, सुदेश सहित कई अन्य मौजूद र