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प्रणब मुखर्जी ने इस मंदिर में की पूजा, जानिए रहस्य

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भारत के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का बुलावा आखिरकार मां बगलामुखी ने स्वीकार कर ही लिया। यह मंदिर हिमाचल के कांगड़ा जिले के देहरा में स्थित है। 15 मार्च को मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बाद मंडी दौरा तो रद हो गया लेकिन मां बगलामुखी के दर्शनों के अभिलाषी राष्ट्रपति को निराश नहीं होना पड़ा। मां के इस शक्तिपीठ में जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से दर्शन के लिए आया उसके दुश्मनों का सम्पूर्ण विनाश हुआ। युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए पांडवों ने भी यहां यज्ञ किया था। पढ़िए इस मंदिर का रहस्य।
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प्रणब मुखर्जी ने इस मंदिर में की पूजा, जानिए रहस्य

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बनखंडी गांव के समीप प्राचीन सिद्धपीठ माता बगलामुखी मंदिर में राष्ट्रपति ने करीब 40 मिनट तक गर्भ गृह में पूजा अर्चना की। महंत देव गिरी के सानिध्य में 11 विद्धान पंडितों ने राष्ट्रपति को पूजा अर्चना करवाने के साथ विधिपूर्वक सर्वसिद्धि हवन करवाया। महंत देव गिरी ने बताया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पारिवारिक सुख शांति के लिए सर्वसिद्ध हवन करवाया है। राष्ट्रपति ने बताया कि काफी समय ने उनके मन में भावना थी कि मां का आशीर्वाद लूं। आज उनकी इच्छा पूरी हो गई। यदि मां ने दोबारा बुलाया तो फिर से मां के चरणों में शीश झुकाने के लिए आऊंगा। अब जानिए मंदिर का रहस्य..
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मंदिर में शत्रु विनाशक हवन है विख्यात- मान्यता है कि बगलामुखी देवी की पूजा से शत्रु का नाश होता है। राजनीति और मुकदमे में विजय प्राप्त होती। सिहांसन प्राप्त होता है। बगलामुखी मंदिर के पंडितों की मानें तो शत्रुविनाशक एवं राजदरबार के लिए हवन किसी भी पहर में किया जा सकता है। अब आपकों बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, और 84 के दंगों के आरोपी जगदीश टाइटलर कब आए यहां और क्या मन्‍नत मांगी थी उन्होंने...

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कई दिग्गज हस्तियां बगलामुखी माता की शरण में आ चुकी हैं। इस देवी की पूजा जिस कामना के साथ की जाती है, वह पूरी हो जाती है। कई श्रद्धालु शत्रु नाश, कई मुकदमे और राजनीति में विजय प्रप्ति और कई स्वास्थ्य लाभ के लिए इस प्राचीन मंदिर में हवन करवाते हैं। कई सियासी नेता तो यहां अक्सर यहां कई बार गुप्त दौरा कर जाते हैं। 1977 में चुनाव में हार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी बगलामुखी मंदिर में अनुष्ठान करवाया था। उसके बाद वह दोबारा सत्ता में आई और 1980 में देश की प्रधानमंत्री बनीं। इसके अलावा इस मंदिर में दिग्गज नेता अमर सिंह, जया प्रदा, आंतकवादी विरोधी फ्रंट के अध्यक्ष मनमिंदर सिंह बिट्टा, कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर, कांग्रेस नेता राज बब्बर की पत्नी नादिरा बब्बर सहित कई हस्तियां पूजा पाठ करवा चुकी हैं। बगलामुखी मंदिर के पंडितों की मानें तो मंदिर में हवन किसी भी पहर में किया जा सकता है। एक और खास बात जानिए...
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आठवीं महाविद्या हैं मां बगलामुखी- मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। हल्दी रंग के जल से इनका प्रकट होना बताया जाता है। इसलिए, हल्दी का रंग पीला होने से इन्हें पीतांबरा देवी भी कहते हैं। इस महाविद्या की उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है। एक और रोचक बात...
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बगलामुखी का यह मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है। पांडुलिपियों में माँ के जिस स्वरूप का वर्णन है, माँ उसी स्वरूप में यहाँ विराजमान हैं। मां पीतवर्ण के वस्त्र, पीत आभूषण तथा पीले रंग के पुष्पों की ही माला धारण करती हैं। मंदिर का रंग भी पीला प्रसाद भी पीला। अब एक और खास बात जानिए..
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पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर के चारों ओर घना जंगल व दरिया है। मंदिर की स्थापना द्वापर युग में पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान एक ही रात में की गई थी, जिसमें सर्वप्रथम अर्जुन एवं भीम द्वारा युद्ध में शक्ति प्राप्त करने तथा माता बगलामुखी की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा की गई थी।

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माता बगलामुखी का दस महाविद्याओं में 8वाँ स्थान है तथा इस देवी की आराधना विशेषकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माता बगलामुखी की आराधना सर्वप्रथम ब्रह्मा एवं विष्णु ने की थी। इसके उपरांत परशुराम ने माता बगलामुखी की आराधना करके अनेक युद्धों में शत्रुओं को परास्त करके विजय पाई थी।

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द्रोणाचार्य, रावण, मेघनाद इत्यादि सभी महायोद्धाओं द्वारा माता बगलामुखी की आराधना करके अनेक युद्ध लड़े गए।
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नगरकोट के महाराजा संसार चंद कटोच भी प्राय: इस मंदिर में आकर माता बगलामुखी की आराधना किया करते थे। इनके आशीर्वाद से उन्होंने कई युद्धों में विजय पाई थी। तभी से इस मंदिर में अपने कष्टों के निवारण के लिए श्रद्धालुओं का निरंतर आना आरंभ हुआ।
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