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पंडित सुखराम: हिमाचल में सियासत के रहे चाणक्य, पर विवादों ने उम्र भर नहीं छोड़ा पीछा

Thu, 12 May 2022 10:31 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

लगभग 60 साल के राजनीतिक सफर में पंडित सुखराम दांवपेंच से भरी राजनीतिक सोच से हिमाचल की सियासत में अपनी दमदार उपस्थिति करवाते रहे। लिहाजा, उन्हें हिमाचल में राजनीति के चाणक्य का दर्जा भी मिला।
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राहुल गांधी व अन्य नेतओं के साथ पंडित सुखराम। - फोटो : संवाद
दिवंगत पंडित सुखराम हिमाचल में सियासत ही नहीं, विवादों का केंद्र भी रहे। 60 साल का जुझारू और संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन उपलब्धियों के साथ विवादों में भी रहा। केंद्रीय दूरसंचार राज्य मंत्री रहते उन्होंने देश के साथ हिमाचल में भी टेलीफोन एक्सचेंज और दूरसंचार का नेटवर्क खड़ा किया। घर-घर फोन की घंटी बजाई। टेलीफोन और पीसीओ कनेक्शन के लिए लंबे इंतजार की व्यवस्था खत्म की। पांगी और लाहौल समेत ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में फोन की घंटी बजाई, जहां उस दौर में कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। राजनीति की ऊंचाइयां छूने के साथ वह टेलीकॉम घोटालों, रिश्वतखोरी और अश्लील सीडी कांड जैसे आरोपों से भी घिरे रहे। भ्रष्टाचार के आरोपों को अदालत में चुनौती देकर खुद को बेदाग साबित करने की उनकी हसरत पूरी नहीं हो पाई। लगभग 60 साल के राजनीतिक सफर में वह दांवपेंच से भरी राजनीतिक सोच से हिमाचल की सियासत में अपनी दमदार उपस्थिति करवाते रहे। लिहाजा, उन्हें हिमाचल में राजनीति के चाणक्य का दर्जा भी मिला। बावजूद इसके उनका मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का सपना कभी पूरा नहीं हुआ।
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लाल कृष्ण आडवाणी के साथ। - फोटो : संवाद
छोटी काशी मंडी ही पंडित सुखराम की कर्मभूमि रही। सदर विधानसभा क्षेत्र मंडी सुखराम का गढ़ है। यहां से उन्होंने कोई चुनाव नहीं हारा। वह पांच बार हिमाचल विधानसभा और तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए। पंडित सुखराम का जन्म 27 जुलाई, 1927 मंडी जिले के इलाका तुंगल स्थित कोटली गांव में पंडित भवदेव के घर हुआ था। उनके पिता पुरोहित थे। साधारण परिवार में जन्मे सुखराम शुरू से ही तेजतर्रार और प्रतिभावान थे। पिता ने उनकी दसवीं तक शिक्षा मंडी के विजय हाई स्कूल में करवाई। उसके पश्चात की शिक्षा वल्लभ कॉलेज और लॉ कालेज दिल्ली से हुई। 1954 में उन्होंने जिला अदालत में वकालत शुरू की। 
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पूर्व पीएम अटल के साथ। - फोटो : संवाद
प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले पंडित सुखराम वर्ष 1993 से 1996 तक  पीवी नरसिम्हा राव सरकार में केंद्रीय दूरसंचार राज्य मंत्री रहे थे। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े कई आरोप लगे थे, लेकिन हिमाचल में उन्हें दूरसंचार क्रांति लाने वाले के तौर पर जाना जाता है। 

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- फोटो : संवाद
 पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम को वर्ष 1996 में एक कंपनी को ठेका देने के बदले तीन लाख रुपये घूस लेने के आरोप में पांच साल जेल की सजा सुनाई गई थी। सीबीआई ने उन्हें आदतन अपराधी करार देते हुए सख्त से सख्त सजा देने की मांग की थी। 
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अभिनेता सलमान खान व अन्य के साथ। - फोटो : संवाद
तीन साल से अधिक की सजा होने पर तत्काल जमानत नहीं मिल सकती, इसलिए उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। आरोप था कि सुखराम ने दूरसंचार राज्य मंत्री के पद पर रहते एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग के लिए ऊंचे दाम पर तार खरीदे। इस मामले में नवंबर 1996 में प्राथमिकी दायर की गई थी।

 
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पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के साथ। - फोटो : संवाद
इसमें उन्हें दोषी पाया गया था। दो अन्यमामलों में दोषी पाया गया था। वर्ष 2009 फरवरी में आय से अधिक चार करोड़ 25 लाख की संपत्ति होने का दोषी पाया गया था। वर्ष 2002 में दूरसंचार विभाग के लिए यंत्रों की खरीदारी में सरकार को एक करोड़ 66 लाख का नुकसान पहुंचाने के लिए उन्हें भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था। मामले में सुखराम को तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
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