ये वही टैंक है जिसे भारतीय सेना 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान पर जीत हासिल करने के बाद भारत ले आई थी। पाक आर्मी का यह टैंक वॉर ट्रॉफी के तौर पर सेना के जवान अपने साथ लाए थे।
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देखिए, उस टैंक की हालत जिसे सेना ने खून बहाकर जीता था
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टैंक पर कब्जा पाने के लिए जवानों को अपना खून तक बहाना पड़ा था।
यह विजय का प्रतीक था मगर अब कबाड़ सा बन गया है। इस टैंक को हिमाचल सरकार
और लोनिवि सहेज नहीं पाए है। आखिरकार अब सेना ने सरकार और विभाग की किरकिरी
करते हुए इस टैंक को वापस मांग लिया है। यह टैंक हिमाचल के प्रवेश द्वार
परवाणू के एक पार्क में रखा गया है।
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पाकिस्तान युद्ध के दौरान जीते गए
टैंक को 1984 में भारतीय सेना ने सरकार को दिया था। इसे परवाणू बैरियर के
नजदीक रखा गया है। यहां भव्य पार्क भी बनाया गया था। इसे बाद में निजी
कंपनी को देखरेख के लिए सौंप दिया था। आज भारतीय सेना की वीरता को सलाम
करने वाला टैंक जंग खा रहा है।
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कुछ दिन पहले पड़ी सेना की नजर-नवंबर के शुरुआती हफ्ते में भारतीय सेना की ओर से जारी पत्र संख्या 1090 से लोक निर्माण विभाग को उक्त टैंक वापस करने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले सेना की इस पर नजर पड़ी। उसके बाद ही सेना ने यह कार्रवाई अमल में लाई।
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टैंक वापस करने पर अभी फैसला नहीं-लोक निर्माण विभाग से उपमंडल अधिकारी बीएस राणा ने माना कि भारतीय सेना ने पत्र लिखकर टैंक को वापस मांगा है। अभी इसे वापस भेजने पर कोई फैसला नहीं लिया है। प्रयास किया जाएगा कि किसी सामाजिक संगठन अथवा निजी कंपनी से मिलकर टैंक तथा पार्क की दशा सुधारी जाए।