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अब बीएड के बाद भी नहीं बन पाएंगे टीचर, देना होगा एक और टेस्ट

Thu, 11 May 2017 11:44 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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बीएड करने के बाद अब शिक्षक की नौकरी हासिल करना और मुश्किल होने वाला है। गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है। यानि बीएड करने के बाद भी युवाओं को एक और टेस्ट से गुजरना होगा। आइए जानते हैं क्या है पूरी योजना-
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एनसीटीई ने बीएड करने के बाद प्रशिक्षित शिक्षकों को नौकरी दिलवाने के लिए एक विशेष तरह की परीक्षा लेने की तैयारी कर ली है। प्रशिक्षित शिक्षकों की काबिलियत परखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इस परीक्षा को लिया जाएगा।
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ऐसा नहीं है कि महज परीक्षा पास करने से काम बन जाएगा। दरअसल इस परीक्षा में पास होने वालों की मेरिट बनाई जाएगी। राज्यवार भी मेरिट जारी की जाएगी। इस प्रक्रिया से स्कूल प्रबंधन को काबिल शिक्षकों को नौकरी देने में आसानी होगी।

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संभावित है कि इसी साल इस योजना को अमलीजामा पहना दिया जाएगा। पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर आए भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा साक्षरता विभाग सचिव अनिल स्वरूप ने साफ किया था कि जिस तरह राष्ट्रीय स्तर पर कई परीक्षाएं ली जाती हैं, उसी तरह बीएड करने वालों की परीक्षा लेने का प्रस्ताव है।
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उन्होंने प्रदेश सरकार से भी टेट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को खत्म कर इस पैट्रन को अपनाने को कहा था। बताया कि देश भर में स्थित सभी बीएड संस्थानों से जल्द ही उनके द्वारा दी जा रही सुविधाओं के संदर्भ में शपथपत्र लिए जाएंगे।
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शपथपत्र में बीएड कॉलेज प्रबंधन को विद्यार्थियों से वसूली जाने वाली फीस, करवाए जा रहे कोर्सों की फीस, इंफ्रास्ट्रक्चर और मान्यता की जानकारी देनी होगी। जो संस्थान इस बाबत शपथपत्र देगा, उसे ही एनसीटीई की ओर से पंजीकृत किया जाएगा। जो संस्थान शपथपत्र नहीं देंगे, उनका पंजीकरण नहीं किया जाएगा। ऐसे संस्थान बीएड भी नहीं करवा सकेंगे।
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