दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नजरें इन दिनों शिमला के आसमान पर टिकी हुई हैं। यहां एक खास चीज चक्कर काट रही है जिस पर बड़े बड़े देशों के वैज्ञानिकों की नजरें टिक गई हैं। आइए जानते हैं-
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चमकदार हवाई जहाज की तरह नजर आ रही इस चीज को लोग अपनी नंगी आंखों से भी देख सकते हैं। नासा ने इसको देखने के लिए टाइम टेबल भी जारी कर दिया है। ऐसे में इन दिनों आपको अगर सुबह-शाम शिमला के आसमान में कोई चमकती हुई वस्तु नजर आती है तो हैरान-परेशान न हों।
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राजधानी शिमला के आकाश में खगोल वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) चक्कर काट रहा है। इसमें पांच वैज्ञानिक महीनों रह रहे हैं और अंतरिक्ष पर तमाम तरह के रोचक रिसर्च कर रहे हैं।
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यह स्टेशन चमकदार हवाई जहाज की तरह नजर आ रहा है। इसे राजधानी शिमला के लोग सुबह और शाम के समय देख सकते हैं। शिमला से बुधवार को सुबह 4.40 और 6.12 बजे एक और चार मिनट के लिए दो बार देखा जा सकता है। इसे बिना किसी दूरबीन या एक्सरे फिल्म के नंगी आंखों से देख सकते हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन 30 नवंबर तक देखा जा सकता है।
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इन दिनों आपको अगर सुबह-शाम शिमला के आसमान में कोई चमकती हुई वस्तु नजर आती है तो हैरान-परेशान न हों। ये अंतरिक्ष में कई तरह के प्रयोगों को अंजाम देने वाला सबसे बड़ा मानव निर्मित उपग्रह आईएसएस है। इसे अमेरिका, रूस समेत 15 देशों की कई बड़ी स्पेस एजेंसियों ने मिलकर तैयार किया है।
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इसकी सूचना दुनिया की बहुचर्चित अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपनी वेबसाइट पर साझा की है। ये लगभग 400 किलोमीटर की दूरी पर पृथ्वी का चक्कर काट रहा है। 90 मिनट के भीतर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। यानी 28000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ये परिक्रमा कर रहा है। इस तरह से शिमला के आसमान पर दिन भर में कई चक्कर काट रहा है। हालांकि, जमीन से यह केवल सुबह और शाम को ही दिखाई देता है।
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आईएसएस एक ऐसा कृत्रिम उपग्रह है, जिसके भीतर अंतरिक्ष विज्ञानी आधुनिक प्रयोग करते आ रहे हैं। वर्ष 1998 लेकर इसके कई हिस्से भेजकर इसे तैयार कर एक बड़े कृत्रिम उपग्रह का आकार दिया गया है। इस अंतरिक्ष स्टेशन के कंपोनेंट्स रूस के प्रोटोन, सोयोज जैसे रॉकेटों के अलावा अमेरिकन स्पेशल शटलों से भेजे गए हैं। इसमें माइक्रोग्रेविटी और अंतरिक्ष पर्यावरण अनुसंधान प्रयोगशालाएं स्थापित हैं। इनमें खगोल विज्ञानी रहते हैं।
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शिमला से जुडे़ एक अंतरिक्ष विज्ञानी ने माना कि नासा ने शिमला के ऊपर आईएसएस के दिखने की सूचना अपनी वेबसाइट पर जारी की है। उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई भी आधिकारिक बयान इसरो ही दे सकता है।
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नासा की वेबसाइट के मुताबिक आईएसएस को केवल सूर्योदय के कुछ समय पहले या सूर्यास्त के समय देखा जा सकता है। ये स्पेस स्टेशन एक हवाई जहाज की तरह नजर आता है। ये बहुत चमकीले तारे की तरह आसमान से गुजरता है। ये लाइट फ्लैश नहीं करता है और इसकी रफ्तार हवाई जहाज से भी कई गुना ज्यादा है। हवाई जहाज जहां 600 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलता है, वहीं ये 17500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ता है।
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भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स जुलाई 2012 में दो अन्य सहयोगियों जापान के आकिहिको होशिदे और रूस के यूरी मालेंचेंको के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में गई थीं। वे करीब चार महीने तक इसमें रहीं।
शिमला में कब-कब देखा जा सकता है ये स्टेशन
दिनांक समय कितने मिनट किस दिशा में
23 नवंबर 4:40 (सुबह) 1 मिनट पूर्व
23 नवंबर 6:12 (सुबह) 4 मिनट पश्चिम
24 नवंबर 5:23 (सुबह) दो मिनट दक्षिण-पश्चिम
26 नवंबर 6:37 (शाम) एक मिनट दक्षिण-पूर्व
27 नवंबर 7:20 (शाम) एक मिनट दक्षिण-पश्चिम
28 नवंबर 6:28 (शाम) तीन मिनट दक्षिण-पश्चिम
29 नवंबर 5:39 (शाम) तीन मिनट पश्चिम
29 नवंबर 7:14 (शाम) एक मिनट दक्षिण-पूर्व
30 नवंबर 6:23 (शाम) तीन मिनट दक्षिण-पश्चिम